होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते भारत आने वाले उर्वरक (खाद) से लदे मालवाहक जहाजों की आपूर्ति श्रृंखला पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टलता नजर आ रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 16 मालवाहक जहाजों में से 10 से 12 जहाज जलमार्ग को पुनः बंद किए जाने से ठीक पहले सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे हैं। इन जहाजों में यूरिया, अमोनिया और डीएपी जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक और कच्चे माल लदे हुए हैं, जिनकी भारत के कृषि क्षेत्र को तत्काल आवश्यकता है।

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूटों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया था। ईरान द्वारा दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमलों के बाद इस मार्ग को दोबारा बंद करने के दावों से ऐन पहले इन जहाजों का सुरक्षित निकलना भारतीय उर्वरक बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया भारत के लिए उर्वरकों और अमोनिया व सल्फर जैसे कच्चे माल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है, और जून में शुरू होने वाले खरीफ बुवाई सीजन से पहले इनकी समय पर आपूर्ति भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत अनिवार्य थी।

इस मार्ग के अवरुद्ध होने से आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिसके परिणामस्वरूप न केवल उर्वरकों की किल्लत की आशंका उत्पन्न हुई थी, बल्कि लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति बाधित होने से मार्च और अप्रैल की शुरुआत में भारत का घरेलू यूरिया उत्पादन भी धीमा पड़ गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने एहतियातन अतिरिक्त एलएनजी आपूर्ति सुरक्षित की थी और खरीफ सीजन के दौरान किसी भी प्रकार की किल्लत से बचने के लिए तीन वैश्विक यूरिया टेंडर भी जारी किए थे। वर्तमान में इन जहाजों के सुरक्षित बाहर आने से वैश्विक बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी की उम्मीद जगी है।

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाजों की आवाजाही निरंतर बनी रहती है, तो डीएपी बनाने के लिए आवश्यक कच्चे माल, जैसे अमोनिया और सल्फर, की उपलब्धता में सुधार होगा, जिससे इनकी कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। यद्यपि पिछले कुछ महीनों में सप्लाई चेन ठप होने के कारण इन कच्चे मालों की वैश्विक कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने बाजार में एक सकारात्मक संकेत दिया है। हालांकि, स्थिति को पूर्णतः सामान्य होने में अभी कुछ महीनों का समय लग सकता है। फिर भी, उर्वरकों से लदे जहाजों का सफलतापूर्वक जलडमरूमध्य पार कर लेना भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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