अमेरिकी सत्ता के गलियारों में हलचल: सीनेट ने पलटा ट्रंप का दांव, क्या कमजोर पड़ रही है व्हाइट हाउस की पकड़?
अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके बजट कटौती और महत्वपूर्ण नामांकनों के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। पैटी मरे और शेल्डन व्हाइटहाउस जैसे सीनेटरों के कड़े रुख के बाद व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ गया है। जानिए कैसे इस विधायी हार ने ट्रंप प्रशासन की 2026 की रणनीतियों को संकट में डाल दिया है और इसका वैश्विक प्रभाव क्या होगा।

वाशिंगटन डी.सी.। अमेरिकी लोकतंत्र के हृदय स्थल, कैपिटल हिल से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने वैश्विक राजनीति के समीकरणों को हिला कर रख दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो अपनी आक्रामक नीतियों और दृढ़ निर्णयों के लिए जाने जाते हैं, उन्हें अमेरिकी सीनेट से एक बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। नए साल की शुरुआत के साथ ही, जहाँ ट्रंप प्रशासन अपनी नीतियों को गति देने की तैयारी में था, वहीं सीनेट के इस कड़े रुख ने व्हाइट हाउस की रणनीतियों पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यह घटनाक्रम केवल एक विधायी हार नहीं है, बल्कि यह ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की प्रशासनिक शक्ति और सीनेट के बीच बढ़ते टकराव का एक स्पष्ट संकेत है।
मुख्य घटनाक्रम की बात करें तो, सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित महत्वपूर्ण बजटीय कटौती और नियुक्तियों के प्रस्तावों को दरकिनार कर दिया है। सीनेट की विनियोग समिति (Appropriations Committee) की उपाध्यक्ष पैटी मरे ने ट्रंप प्रशासन द्वारा प्रस्तावित "कठोर और गुमराह करने वाली" कटौती को सिरे से खारिज करते हुए इसे देश के भविष्य के लिए घातक बताया। विशेष रूप से विज्ञान और डेटा एजेंसियों जैसे नासा (NASA) और नेशनल साइंस फाउंडेशन (NSF) के बजट में की जाने वाली 57% तक की कटौती के प्रस्ताव को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स दोनों ने मिलकर खारिज कर दिया। सीनेट के इस कदम को राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़े व्यक्तिगत और राजनैतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें उनकी अपनी पार्टी के कई सदस्यों ने भी विपक्ष का साथ दिया है।
कानूनी और आधिकारिक बारीकियों पर नजर डालें तो, यह विवाद 'पावर ऑफ द पर्स' यानी खर्च करने की शक्ति को लेकर है। सीनेटर शेल्डन व्हाइटहाउस और मार्टिन हेनरिक ने सदन के पटल पर ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि कार्यपालिका अपनी संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही है। वहीं, सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून के लिए भी यह स्थिति किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि उन्हें एक ओर ट्रंप के एजेंडे को आगे बढ़ाना है और दूसरी ओर सीनेट की अपनी स्वायत्तता की रक्षा करनी है। इसके अलावा, कैबिनेट नामांकन के मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं; जहाँ पीट हेगसेथ और रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर जैसे नामों को लेकर सीनेट में पहले ही तीखी बहस छिड़ी हुई है, वहीं मैट गेट्ज़ जैसे विवादित नामांकनों का वापस होना प्रशासन की किरकिरी करा चुका है।
इस घटना का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह 2026 के मध्यावधि चुनावों (Midterms) से ठीक पहले हो रहा है। सीनेट का यह विद्रोह यह दर्शाता है कि अमेरिकी संसद अब राष्ट्रपति के हर आदेश पर मुहर लगाने को तैयार नहीं है। पैटी मरे और शेल्डन व्हाइटहाउस जैसे वरिष्ठ नेताओं का यह कड़ा रुख आने वाले दिनों में व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच एक बड़े संवैधानिक संकट की आहट दे रहा है। ट्रंप के लिए चुनौती अब केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के उन सांसदों से है जो लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थागत स्वतंत्रता को सर्वोपरि मान रहे हैं। यह 'सीनेटी झटका' आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति और घरेलू सुधारों की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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