जाफना के पास पोर्ट विकसित करेगा भारत, श्रीलंका से डील लगभग फाइनल|
श्रीलंका के उत्तरी तट पर स्थित कांकेसंथुराई बंदरगाह के विकास के लिए भारत और श्रीलंका के बीच 61 मिलियन डॉलर का समझौता लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है।

श्रीलंका के उत्तरी तट पर स्थित कांकेसंथुराई बंदरगाह और आसपास के बुनियादी ढांचे का हवाई दृश्य।
भारत और श्रीलंका के बीच एक बहुत ही महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौता लगभग फाइनल होने की कगार पर पहुंच गया है। इस डील के तहत श्रीलंका के उत्तरी तट पर जाफना के पास स्थित कांकेसंथुराई बंदरगाह (Kankesanthurai Port) को भारत द्वारा विकसित किया जाएगा। यह इलाका कभी लिट्टे का गढ़ रहा था। भारतीय तट के बेहद करीब होने के कारण यह पोर्ट रणनीतिक और व्यावसायिक दोनों ही दृष्टियों से बहुत अधिक अहमियत रखता है।
इस 61 मिलियन डॉलर के भारत-फंडेड प्रोजेक्ट को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत ने काफी रफ्तार पकड़ ली है। हाल ही में कोलंबो में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव से जुड़े कई लंबित मुद्दों और मामलों को सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। इस महत्वपूर्ण चर्चा की अगुवाई श्रीलंका के बंदरगाह और नागरिक उड्डयन मंत्री अनुरा करुणातिलका और भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर मैत्रेय कुलकर्णी ने संयुक्त रूप से की। विचार-विमर्श के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि परियोजना के सुचारू कार्यान्वयन, देखरेख और निगरानी के लिए एक संयुक्त निगरानी समिति और एक तकनीकी समिति का गठन किया जाना चाहिए।
यह प्रस्तावित समझौता दोनों पड़ोसी देशों के बीच आपसी आर्थिक सहयोग और मजबूत होते रिश्तों की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम साबित होगा। इतिहास पर नजर डालें तो यह बंदरगाह कभी भारत और श्रीलंका के बीच यात्रियों और माल की आवाजाही का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। हालांकि, तमिल विद्रोहियों के साथ दशकों तक चले लंबे गृहयुद्ध के कारण इसका संचालन पूरी तरह से बंद हो गया था। अब युद्ध की समाप्ति के बाद श्रीलंका के उत्तरी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए इस बंदरगाह का पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण बेहद जरूरी माना जा रहा है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, यह प्रस्तावित समझौता श्रीलंका के लिए एक प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर के रूप में भारत की लगातार बढ़ती और मजबूत होती भूमिका को साफ तौर पर दर्शाता है। यह अहम कूटनैतिक और आर्थिक विकास ऐसे समय में सामने आ रहा है जब कोलंबो अपनी अर्थव्यवस्था को हालिया वर्षों के गंभीर आर्थिक संकट से उबारने और स्थिर करने के लिए लगातार विदेशी निवेश की तलाश कर रहा है। कांकेसंथुराई बंदरगाह के इस विकास से न केवल दोनों देशों के बीच समुद्री संपर्क काफी मजबूत होगा, बल्कि यात्रियों और माल के परिवहन को भी बेहद आसान बनाने में भारी मदद मिलेगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
