दोस्ती की नई मिसाल: जब संकट के समंदर में भारत का 'सारथी' बना दक्षिण कोरिया,राष्ट्रपति ली ने खोला दिल!
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने समुद्री मार्ग सुरक्षा, K9 वज्र रक्षा सौदे और आत्मनिर्भर भारत के लिए सियोल के अटूट समर्थन पर साझा किया अपना विजन।

नई दिल्ली में आधिकारिक बैठक के दौरान दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग बाएं से दाएं: राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, उनकी पत्नी किम हये-क्युन, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य अधिकारी|
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के अशांत समंदर और होर्मुज जलडमरूमध्य में मंडराते युद्ध के बादलों के बीच दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की भारत यात्रा ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है। सियोल और नई दिल्ली के संबंधों की यह घनिष्ठता केवल व्यापारिक हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो लोकतांत्रिक महाशक्तियों के अस्तित्व और वैश्विक सुरक्षा के साझा विजन का प्रतिबिंब है। राष्ट्रपति ली ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में भारत और दक्षिण कोरिया का एक साथ आना न केवल समय की मांग है, बल्कि एक सुरक्षित भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता भी है।
भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने एक विशेष साक्षात्कार में रणनीतिक साझेदारी के उन सूक्ष्म पहलुओं पर प्रकाश डाला, जो आने वाले दशकों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की दिशा तय करेंगे। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह समुद्री मार्ग दोनों देशों की जीवनरेखा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के मद्देनजर उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्री मार्गों की निर्बाध सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दक्षिण कोरिया और भारत कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं का विविधीकरण और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समन्वय इस साझेदारी का मुख्य केंद्र बिंदु है।
साक्षात्कार के दौरान राष्ट्रपति ली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का भी भावुकता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के साथ उनकी मुलाकात किसी पुराने मित्र से मिलने जैसा अनुभव कराती है, क्योंकि दोनों ही नेता 'जन-केंद्रित राजनीति' में अटूट विश्वास रखते हैं। यह व्यक्तिगत केमिस्ट्री ही है जो व्यापार, रक्षा और उच्च तकनीक जैसे क्षेत्रों में जटिल वार्ताओं को सहज बना रही है। 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) को उन्नत करने की चल रही प्रक्रिया इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर जहाज निर्माण और रक्षा उद्योग में 'मेक इन इंडिया, टुगेदर विद कोरिया' के विजन को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की पहल को दक्षिण कोरिया का समर्थन एक नया रणनीतिक आयाम जोड़ रहा है। K9 वज्र होवित्जर परियोजना का उदाहरण देते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि इसके दूसरे चरण में निर्माण का 60 प्रतिशत से अधिक कार्य भारत में ही किया जा रहा है। यह केवल हथियारों की बिक्री नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य तकनीक को साझा करने और सह-उत्पादन करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके अतिरिक्त, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भरता कम करना दोनों देशों के लिए एक अस्तित्वगत प्रश्न बन गया है। भारत के पास उपलब्ध प्रचुर खनिजों और दक्षिण कोरिया की रिचार्जेबल बैटरी एवं इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण की क्षमता का मेल एक ऐसी आपूर्ति श्रृंखला बना सकता है जो वैश्विक बाजार में चीन के एकाधिकार को चुनौती देने में सक्षम होगी।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता पर बात करते हुए राष्ट्रपति ली ने सियोल की भूमिका को एक 'सेतु' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी देश अकेले इस विशाल समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता। भारत के नेतृत्व वाली 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' में शामिल होने का इरादा जताते हुए उन्होंने संकेत दिया कि नियमों पर आधारित एक समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में दोनों देशों की भूमिका निर्णायक होगी। अंततः, यह यात्रा और राष्ट्रपति ली का यह व्यापक विजन भारत और दक्षिण कोरिया के बीच मित्रता के उस सुदृढ़ स्तंभ की स्थापना कर रहा है, जो आने वाले समय में न केवल एशिया बल्कि संपूर्ण विश्व की समृद्धि और शांति का आधार बनेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
