भारत का साथ देने क्यों आया साऊथ कोरिया ? जाने राष्ट्रपति 'ली' ने किस लिए बढ़ाया गठबंधन का हाथ
Iran -US तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित व्यापार के लिए दक्षिण कोरिया ने भारत का साथ चुना है। राष्ट्रपति ली ने PM मोदी संग वार्ता से पहले बड़ा ऐलान किया।

राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में (बाएं से दाएं) दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की पत्नी किम ह्ये-क्युंग, द्रौपदी मुर्मू , राष्ट्रपति ली जे-म्युंग और नरेंद्र मोदी कलाकारों के साथ समूह चित्र में।
South Korea India relations : वैश्विक कूटनीति के पटल पर और समुद्र की अशांत लहरों के बीच, ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़े महा-गठबंधन की नींव रखी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले 'होर्मुज स्ट्रेट' (जलडमरूमध्य) पर मंडराते गंभीर खतरे के बीच, दक्षिण कोरिया ने मजबूती से भारत का हाथ थाम लिया है। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सोमवार को स्पष्ट शब्दों में ऐलान किया कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन सुनिश्चित करने के लिए सियोल और नई दिल्ली को कंधे से कंधा मिलाकर काम करना होगा। यह रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब मध्य पूर्व में किसी भी तरह की रुकावट से न केवल वैश्विक तेल की कीमतों में आग लग रही है, बल्कि महत्वपूर्ण औद्योगिक सामग्रियों की वैश्विक सप्लाई चेन भी बुरी तरह चरमरा गई है।
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक विशेष साक्षात्कार में राष्ट्रपति ली ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया, दोनों ही अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मुख्य रूप से मध्य पूर्व के कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस पर अत्यधिक निर्भर हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट जैसे अति-संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री रास्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करना महज व्यापारिक जरूरत नहीं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा और उनके व्यापक आर्थिक हितों को बचाने के लिए जीवन-मरण का प्रश्न बन गया है। उन्होंने कूटनीतिक प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अनिश्चितता के घने बादलों को छांटने और वैश्विक अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए कोरिया भारत के साथ निरंतर और निकट संपर्क बनाए रखेगा। दोनों देश अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक साझा आवाज बनकर उभरेंगे ताकि हर व्यापारिक जहाज बिना किसी खौफ के इस मार्ग से गुजर सके।
यह साझेदारी केवल तेल और गैस की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि दोनों देश भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक कच्चे माल पर अपनी निर्भरता को भी नया रूप देने जा रहे हैं। राष्ट्रपति ली ने महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) की सप्लाई चेन को अभेद्य बनाने के लिए एक नया दृष्टिकोण पेश किया। उनका मानना है कि केवल आयात करने के पुराने मॉडल से बाहर निकलकर, अब कोरिया की अत्याधुनिक तकनीक और भारत के विशाल खनन एवं रिफाइनिंग उद्योग को एक साथ मिलाकर एक बेहद स्थिर और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला तैयार की जा सकती है। यह कदम वैश्विक बाजार में दोनों देशों की आत्मनिर्भरता को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
इस भू-राजनीतिक हलचल के बीच, यह रणनीतिक घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ राष्ट्रपति ली की होने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय शिखर बैठक से ठीक पहले आई है। इस शिखर वार्ता में ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा के साथ-साथ रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), जहाज निर्माण (शिपबिल्डिंग) और वित्त जैसे अहम रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की नई इबारत लिखी जाएगी। पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल के दायरे से बाहर निकलकर रक्षा और शिपबिल्डिंग में यह प्रस्तावित तालमेल इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नई और अजेय आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने की तैयारी कर रहे हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
