पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में पार्टी कार्यकर्ता के परिजनों से मिलने पहुंचे टीएमसी सांसद को उग्र प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा।

Abhishek Banerjee attacked in Sonarpur : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले का सोनारपुर इलाका शनिवार को उस वक्त भीषण राजनीतिक हिंसा और कुरुक्षेत्र का गवाह बन गया, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी के काफिले पर एक उग्र भीड़ ने अचानक धावा बोल दिया। हाल ही में संपन्न हुए अप्रैल-मई 2026 के विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद से ही राज्य में राजनीतिक तपिश चरम पर है। इसी कड़ी में शनिवार को सोनारपुर पहुंचे अभिषेक बनर्जी को न केवल भारी जनआक्रोश और विरोध का सामना करना पड़ा, बल्कि उन पर हिंसक हमला भी किया गया। उग्र भीड़ ने उनके काफिले को चारों तरफ से घेरकर पत्थरों और अंडों की बौछार कर दी। स्थिति इस हद तक बेकाबू हो गई कि हमलावरों ने उनके कपड़े तक खींचने की कोशिश की, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने अत्यंत मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

यह संवेदनशील घटना उस समय घटी जब अभिषेक बनर्जी हालिया विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी शिकस्त के बाद मारे गए अपनी पार्टी के एक सक्रिय कार्यकर्ता, संजू कर्मकार के पीड़ित परिवार से मिलने सोनारपुर पहुंचे थे। टीएमसी का आरोप है कि संजू कर्मकार की हत्या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित डकैतों और गुंडों द्वारा चुनावी रंजिश के तहत की गई थी। जैसे ही बनर्जी का काफिला संजू के आवास के निकट पहुंचा, पहले से घात लगाए बैठे प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी और देखते ही देखते यह विरोध हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए भीड़ ने गाड़ी पर पथराव किया। सुरक्षा अधिकारियों ने किसी तरह स्थिति को संभाला और टीएमसी नेता को तुरंत संजू कर्मकार के घर के भीतर ले गए, जहां सुरक्षा कारणों से उन्हें लगभग 90 मिनट से अधिक समय तक अंदर ही रहना पड़ा।


इस अप्रत्याशित और हिंसक हमले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अभिषेक बनर्जी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित और भाजपा द्वारा प्रायोजित एक सोची-समझी हत्या की साजिश करार दिया है। उन्होंने घटनास्थल से ही हुंकार भरते हुए कहा कि इस कायराना हरकत के पीछे शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब किया जाएगा और वह इसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाएंगे। इस घटना की गूंज कोलकाता के सियासी गलियारों तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे लोकतंत्र पर आघात बताया है, वहीं विपक्षी दलों के कई शीर्ष नेताओं ने भी किसी राजनेता पर इस तरह के शारीरिक हमले को अनुचित ठहराया है। इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे टीएमसी के पिछले शासनकाल के दौरान हुए कथित अत्याचारों के खिलाफ आम जनता का स्वाभाविक आक्रोश बताया है।

कानूनी और आधिकारिक मोर्चे पर, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सोनारपुर और आस-पास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में अभिषेक बनर्जी या उनके किसी सुरक्षाकर्मी को कोई गंभीर चोट नहीं आई है, लेकिन पुलिस ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ दंगा भड़काने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और वीआईपी सुरक्षा में चूक के विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है।

सोनारपुर में हुई यह हिंसक झड़प महज एक तात्कालिक घटना नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी नतीजों के बाद से जारी गहरे जमीनी ध्रुवीकरण और राजनीतिक रंजिश को उजागर करती है। चुनावों की समाप्ति के बावजूद राज्य में शांति व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहां दोनों ही प्रमुख दल एक-दूसरे पर हिंसक हमलों के आरोप लगा रहे हैं। इस घटना ने आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और अधिक तीखे टकराव और वैधानिक लड़ाइयों के रास्ते खोल दिए हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की एक बड़ी अग्निपरीक्षा खड़ी हो गई है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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