Sonam Wangchuk की रिहाई; 6 महीने की जेल के बाद लद्दाख के 'आइस मैन' की घर वापसी
लद्दाख के प्रमुख सक्रियतावादी Sonam Wangchuk 6 महीने की जेल के बाद रिहा। सरकार ने NSA के तहत हिरासत की रद्द। राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग पर बढ़ी चर्चा।

Sonam Wangchuk
Ladakh statehood protest 2026 : हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर सत्ता के गलियारों तक गूँजने वाली लद्दाख की सबसे प्रभावशाली आवाज को आखिरकार राहत मिल गई है। भारत सरकार ने 14 मार्च को लद्दाख के प्रख्यात पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द करते हुए उन्हें छह महीने बाद रिहा कर दिया है। 62 वर्षीय वांगचुक की रिहाई केवल एक व्यक्ति की आजादी नहीं, बल्कि लद्दाख के नागरिक अधिकारों के लिए चल रहे लंबे संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
विवाद की पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी :
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का सिलसिला 24 सितंबर 2025 को लेह में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद शुरू हुआ था। साल 2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही, वहां की जनता पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा कवच प्रदान करने की मांग कर रही है। वांगचुक, जिन्होंने 'आइस स्तूप' जैसी नवाचार तकनीकों से जल संकट के खिलाफ लड़ाई लड़ी और SECMOL जैसे संस्थान की नींव रखी, इन मांगों के प्रमुख चेहरा बन चुके थे। सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन पर एनएसए (NSA) लागू किया था, जिसकी मानवाधिकार संगठनों ने तीखी आलोचना की थी।
The government has decided to revoke the detention of Sonam Wangchuk with immediate effect by exercising the powers available under the National Security Act: Ministry of Home Affairs
— ANI (@ANI) March 14, 2026
(File pic of climate activist Sonam Wangchuk) pic.twitter.com/QaWpy1sa0s
राजनीतिक प्रतिक्रिया और कानूनी आयाम :
वांगचुक की रिहाई के बाद जहां लद्दाख में उनके समर्थकों ने इसे 'धैर्य और संकल्प की जीत' के रूप में मनाना शुरू कर दिया है, वहीं देश के राजनीतिक हलकों में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्षी नेताओं ने, विशेषकर अरविंद केजरीवाल ने, इस पूरी कार्रवाई को सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग करार दिया है। विपक्षी दलों का तर्क है कि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शिक्षाविद् के खिलाफ एनएसए जैसे कठोर कानून का उपयोग करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। सरकार का यह कदम अब कार्यकर्ताओं के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के बढ़ते उपयोग पर एक नई कानूनी और सामाजिक समीक्षा को जन्म दे रहा है।
- हिरासत की अवधि: लगभग 180 दिन (छह महीने)।
- प्रमुख मांगें: पूर्ण राज्य का दर्जा और लद्दाख के लिए छठी अनुसूची की सुरक्षा।
- कानूनी आधार: राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को वापस लिया गया।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
