राजनीति से दूरी या परीक्षा व्यवस्था को चुनौती? कॉकरोच जनता पार्टी के मंच पर सोनम वांगचुक की 'मन की बात'|
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र प्रदर्शन में पहुंचे सोनम वांगचुक ने नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की वकालत की।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित छात्र प्रदर्शन के दौरान मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक|
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर शनिवार को एक बार फिर देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था और बार-बार होते पेपर लीक के खिलाफ आक्रोश का गवाह बना। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के बैनर तले आयोजित इस विशाल छात्र आंदोलन को उस समय एक बड़ा वैचारिक संबल मिला, जब मशहूर शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सीधे मंच पर पहुंचे। वांगचुक के आंदोलन में शामिल होने से छात्रों का हौसला दोगुना हो गया। हालांकि, इस दौरान छात्रों द्वारा उन्हें देश का भावी शिक्षा मंत्री बनने के आग्रह को उन्होंने पूरी विनम्रता के साथ खारिज कर दिया।
मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक ने देश के वर्तमान शैक्षणिक ढांचे में बुनियादी और क्रांतिकारी बदलाव की वकालत की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश में बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होना एक गंभीर चिंता का विषय है, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। वांगचुक ने जोर देकर कहा कि इस पूरी व्यवस्था में शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि जब तक देश के राजनेताओं, मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के बच्चे अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक सरकारी व्यवस्था में कोई सुधार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं, उन्हें जमीनी स्तर पर उसी व्यवस्था के खट्टे-मीठे अनुभवों का सामना करना चाहिए।
भाषण के दौरान जब वहां मौजूद सैकड़ों युवाओं और छात्रों ने 'सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाओ' के नारे लगाने शुरू किए, तो वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष राजनीति या प्रशासनिक भूमिका में आने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से धरने-प्रदर्शनों के पक्ष में नहीं रहते हैं, लेकिन जब देश के भविष्य यानी युवाओं और छात्रों की जायज मांगों को अनसुना कर दिया जाए, तो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक का कर्तव्य बन जाता है।
इससे पहले, आंदोलन की अगुवाई कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। दीपके ने कहा कि पिछले एक महीने से छात्र शांतिपूर्ण तरीके से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी जायज मांगों पर ध्यान देने के बजाय आंदोलन से जुड़ी सोशल मीडिया गतिविधियों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने में लगी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भले ही समाज के कुछ वर्ग दबाव में आकर व्यवस्था से समझौता कर लें, लेकिन देश का युवा वर्ग अपने अधिकारों और न्याय की लड़ाई से पीछे नहीं हटने वाला है। आंदोलन के दौरान दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण दोपहर करीब तीन बजे अभिजीत दीपके की तबीयत अचानक बिगड़ गई, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद उन्होंने फिर से प्रदर्शनकारियों का हौसला बढ़ाया।
आंदोलन के समापन पर आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन तो महज एक शुरुआत है। दीपके ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो अगले शनिवार को फिर से जंतर-मंतर पर इससे भी बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने ऐलान किया कि आने वाले दिनों में इस आंदोलन को केवल दिल्ली तक सीमित न रखकर देश के हर राज्य और हर शहर तक पहुंचाया जाएगा, ताकि प्रत्येक छात्र की आवाज बुलंद हो सके। इस विरोध प्रदर्शन को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के वर्तमान और पूर्व छात्र नेताओं के साथ-साथ कई राजनीतिक संगठनों का भी पुरजोर समर्थन मिला। वामपंथी नेता और सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे।
प्रदर्शन की समाप्ति के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक और सनसनीखेज संदेश साझा करते हुए अभिजीत दीपके ने दावा किया कि पिछले 15 दिनों से उनके परिवार को लगातार धमकियां मिल रही थीं, जिसके कारण उनके माता-पिता को अपना घर तक छोड़ना पड़ा था। उन्होंने बताया कि वह एक साल से अधिक समय के बाद अपने माता-पिता से मिलने जा रहे हैं ताकि उन्हें सुरक्षित वापस ला सकें। उन्होंने समर्थकों को धन्यवाद देते हुए लिखा कि आज का प्रदर्शन सिर्फ एक 'ट्रेलर' था, असली लड़ाई अभी बाकी है। इस घटनाक्रम ने देश में शिक्षा सुधारों और छात्र अधिकारों के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
