नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर नीट-यूजी परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में चल रहा प्रदर्शन लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' के बैनर तले आयोजित इस धरने पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके इस लंबे अनशन के कारण बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए देश भर के बुद्धिजीवियों, कलाकारों और विपक्षी नेताओं ने चिंता व्यक्त की है। समर्थन का दायरा इतना विस्तृत हो गया है कि अब 1800 से अधिक नामचीन हस्तियों ने एक खुला पत्र जारी कर वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है।

इस समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, लेखिका अरुंधति रॉय, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, जयंती घोष, निवेदिता मेनन और अनुराधा चिनॉय जैसी प्रतिष्ठित शख्सियतें शामिल हैं। इन सभी का मानना है कि सोनम वांगचुक देश की एक अनमोल धरोहर हैं और उनकी सेहत को लेकर पूरा देश चिंतित है। इससे पूर्व टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एनसीपी नेता रोहित पवार और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उनके स्वास्थ्य के प्रति चिंता जताते हुए अनशन खत्म करने की पुरजोर अपील की है। अभिनेता ओमी वैद्य ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि 'थ्री इडियट्स' फिल्म का पात्र फुंसुख वांगडू असल जिंदगी में सोनम वांगचुक से ही प्रेरित है, और उन्हें किसी भी कीमत पर कोई नुकसान नहीं होना चाहिए।

विरोध प्रदर्शन के आयोजकों ने इस संघर्ष को नई दिशा देने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं को जंतर-मंतर पर आमंत्रित किया है। पार्टी ने पत्र के माध्यम से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को विशेष न्योता भेजा है। साथ ही, दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता थलपति विजय समेत कई वरिष्ठ नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है ताकि वे युवाओं के इस संघर्ष में उनके साथ खड़े हो सकें। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी धरने को अपना समर्थन दिया है और गुरुवार को जंतर-मंतर पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की घोषणा की है।

जंतर-मंतर पर मौजूद दृश्य एक अलग ही कहानी बयां करते हैं। दिल्ली की आपाधापी के बीच, यह धरना स्थल एक ऐसे संसार में बदल गया है जहाँ 20 से 30 वर्ष की आयु के युवा रात के अंधेरे में भी अपनी उम्मीदों को जीवित रखे हुए हैं। प्रदर्शन स्थल पर न तो नारों की कर्कशता है और न ही जल्दबाजी; यहाँ एक प्रकार का ठहराव है। बैनरों पर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव, परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांगें लिखी हुई हैं। कहीं गिटार की धुन पर इंकलाबी तराने गाए जा रहे हैं, तो कहीं छोटे-छोटे समूहों में शिक्षा नीति और बेरोजगारी जैसे विषयों पर गंभीर चर्चाएं हो रही हैं।

धरना स्थल पर मौजूद युवाओं का मानना है कि यह विरोध केवल आवाज उठाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए है। सोनम वांगचुक मंच पर लेटे हुए लगातार अनशन जारी रखे हुए हैं, जबकि उनके आसपास लोग आते हैं और उनके जज्बे को नमन कर लौट जाते हैं। इन प्रदर्शनकारियों की ओर से मॉनसून सत्र की शुरुआत में 20 जुलाई को संसद मार्च का भी आह्वान किया गया है। यह आंदोलन अब केवल एक परीक्षा के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की युवा पीढ़ी की शिक्षा व्यवस्था के प्रति गहरी चिंता और बदलाव की एक गंभीर आकांक्षा बन गया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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