SIR voter controversy Case : SIR पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी मुहर; विपक्ष को मिला करारा झटका
SIR voter controversy Case : सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया पर बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकारों की पुष्टि की और प्रक्रिया रोकने से इनकार किया। विपक्ष की चुनौती खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची को शुद्ध रखना आयोग का दायित्व है। किसी अनियमितता पर अदालत हस्तक्षेप करेगी, लेकिन SIR देशभर में जारी रहेगा।

SIR voter controversy Case
SIR voter revision supreme court judgment : देशभर में चल रहे गहन मतदाता पुनरीक्षण अभियान SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसने विपक्ष की उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया। अदालत ने साफ कर दिया कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके पास SIR संचालित करने का पूरा अधिकार है। शीर्ष अदालत ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि अगर किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है, तो वह तत्काल हस्तक्षेप करने में संकोच नहीं करेगी।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब 12 राज्यों में SIR अभियान जोर पकड़ रहा है और विपक्ष इसके खिलाफ सवाल उठा रहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने राजद सांसद मनोज झा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि आयोग की इस प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से चुनौती देने का कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है। अदालत के अनुसार, मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक रखना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, और वह इस दायित्व को पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने SIR की वैधता पर सवाल उठाते हुए दलील दी कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक हैं जो फॉर्म भरने में सक्षम नहीं हैं, और यह प्रक्रिया अनजाने में उन्हें मतदाता सूची से बाहर कर सकती है। उन्होंने यह भी पूछा कि किसी नागरिक की भारतीयता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग को किसने दिया। उनका कहना था कि आधार कार्ड से संबंधित प्रमाण पर्याप्त है, और 18 वर्ष से अधिक आयु वाला व्यक्ति स्वयं-घोषणा के आधार पर मतदाता सूची में शामिल हो सकता है।
इन दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ग्रामीण भारत में लोग मतदान प्रक्रिया के प्रति बेहद सजग रहते हैं और अपने क्षेत्र के निवासियों की पहचान से अच्छी तरह परिचित होते हैं। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि चुनाव आयोग ने पूर्व निर्देशों के आधार पर अपनी प्रक्रिया को मजबूत किया था और उसके बाद किसी प्रकार की औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में SIR को रोकने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि अब तक ऐसी कोई विश्वसनीय शिकायत सामने नहीं आई है जो इस प्रक्रिया की निष्पक्षता या कानूनी वैधता पर सवाल खड़ा करे। हालांकि कोर्ट ने यह भरोसा दिलाया कि यदि किसी पात्र मतदाता को इस प्रक्रिया की वजह से अपने अधिकार से वंचित होने का खतरा दिखाई देता है, तो अदालत तुरंत हस्तक्षेप करेगी।
सुनवाई के बाद यह मामला आगे के विचार के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है, लेकिन अभी के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला चुनाव आयोग के पक्ष में एक निर्णायक जीत के रूप में देखा जा रहा है। SIR अभियान अब देशभर में बिना किसी रोक-टोक के जारी रहेगा, और मतदाता सूची को शुद्ध करने का यह सबसे बड़ा राष्ट्रीय अभियान अपनी गति से आगे बढ़ता रहेगा।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
