महाराष्ट्र की राजनीति में जारी उठापटक के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) पर संकट के बादल गहराते नजर आ रहे हैं। सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि पार्टी के लोकसभा सांसदों के बाद अब कई विधायक भी उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खेमे के संपर्क में हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना (UBT) के पास कुल 20 विधायक हैं, और ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि इनमें से कई विधायक अलग गुट बनाने या सीधे शिंदे गुट की शिवसेना में शामिल होने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल अटकलें नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। यदि विश्वसनीय सूत्रों की मानें, तो एकनाथ शिंदे खेमा पार्टी के सांसदों को अपने पाले में लाने के बाद अब विधायकों को भी बड़ी संख्या में पार्टी छोड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। इस संभावित टूट की भनक लगते ही उद्धव ठाकरे खेमा पूरी तरह से सतर्क हो गया है। इसी सक्रियता के तहत उद्धव ठाकरे ने मातोश्री स्थित अपने आवास पर पार्टी सांसदों की आपात बैठक बुलाई है। इसके अतिरिक्त, आगामी 22 जून को विधायकों और एमएलसी के साथ भी एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है, जिसमें भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

इस अनिश्चितता के माहौल में उद्धव ठाकरे खेमे ने संवैधानिक और कानूनी स्तर पर भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद अरविंद सावंत ने उद्धव ठाकरे के निर्देशों का पालन करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से पार्टी ने स्पष्ट किया है कि कुछ सांसद लोकसभा के भीतर अलग समूह के रूप में मान्यता प्राप्त करने या किसी अन्य दल में विलय का प्रयास कर रहे हैं, जिसका पार्टी कड़ा विरोध करती है।

पत्र में तर्क दिया गया है कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का असली होने का दावा अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए ऐसी स्थिति में किसी भी अलग समूह को मान्यता देना अनुचित होगा। कानूनी पक्ष रखते हुए कहा गया है कि संसदीय दल का अस्तित्व पूरी तरह से राजनीतिक दल पर निर्भर होता है और यह उसी के एक अंग के रूप में कार्य करता है। संवैधानिक ढांचा एक ही राजनीतिक दल का प्रतिनिधित्व करने वाले कई प्रतिस्पर्धी समूहों की अनुमति नहीं देता है। पत्र में मांग की गई है कि संसद के भीतर केवल एक ही अधिकृत पार्टी नेतृत्व और व्हिप को मान्यता दी जानी चाहिए, जो मूल पार्टी की संरचना के अधीन कार्य करे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन राजनीतिक हलचलों के बीच आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस करवट बैठती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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