नेपाल बाढ़ में 287 भारतीय लापता, शशि थरूर ने जयशंकर को लिखा पत्र; NDRF और हेलिकॉप्टर भेजने की मांग|
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को पत्र लिखकर नेपाल बाढ़ में लापता भारतीयों के बचाव और राहत कार्यों तेज करने की मांग की है।

नेपाल बाढ़ और राहत कार्यों के संदर्भ में कांग्रेस सांसद शशि थरूर का बयान देते हुए प्रतीकात्मक दृश्य।
पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद मानवीय संकट गहराता जा रहा है, और इस मुश्किल घड़ी में भारत के राजनीतिक गलियारों से भी राहत कार्यों को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ सांसद और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सदस्य शशि थरूर ने देश के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को एक विस्तृत पत्र लिखा है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान लापता हुए भारतीय नागरिकों की खोज और बचाव के लिए केंद्र सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की खुलकर सराहना की है, साथ ही बचाव अभियानों को और अधिक व्यापक बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण और व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं।
यह पूरा घटनाक्रम उस समय शुरू हुआ जब नेपाल-तिब्बत सीमा के समीप स्थित एक ग्लेशियर अचानक ढह गया, जिसके परिणामस्वरूप भारी मात्रा में बर्फ, चट्टानें और मलबे का एक खतरनाक एवलांच आ गया। पानी, कीचड़ और मलबे के इस सैलाब ने मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को पूरी तरह से अपनी चपेट में लेकर तबाह कर दिया। इस आपदा ने वहां के जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया और कई पनबिजली स्टेशनों को पूरी तरह से बहाकर नष्ट कर दिया। शनिवार तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मध्य नेपाल में इस अचानक आई बाढ़ के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 669 तक पहुंच चुकी है, क्योंकि लगातार खोज अभियान के दौरान और अधिक शव बरामद किए जा रहे हैं। इसके अलावा, दो हजार से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, और सभी आठ प्रभावित जिलों से राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस भयानक त्रासदी के बाद से कई भारतीय नागरिक भी नेपाल में लापता हैं, जिनकी कुल संख्या 287 के करीब है। विदेश मंत्री को लिखे गए अपने पत्र में शशि थरूर ने संकट की इस घड़ी में भारत सरकार द्वारा दिखाई गई त्वरित प्रतिक्रिया की जमकर तारीफ की है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काठमांडू से तुरंत संपर्क साधना, राहत सामग्री की चार खेपें भेजना, तथा डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और विशेष टनल रेस्क्यू एक्सपर्ट्स की एक ग्यारह सदस्यीय टीम को तुरंत मैदान में उतारना बेहद असरदार साबित हुआ है। इसके साथ ही कंट्रोल रूम और दूतावास की हेल्पलाइन शुरू किए जाने से प्रभावित परिवारों को काफी संबल मिला है।
सांसद शशि थरूर ने नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव और उनके पूरे दल के समर्पण की भी सराहना की, जिन्होंने दिन-रात एक करके राहत कार्यों को गति दी। उन्होंने उल्लेख किया कि तिब्बत से लौटे भारतीय नागरिकों के समूह का हवाई अड्डे पर स्वागत किए जाने और त्रिशूली-1 परियोजना के पास फंसे भारतीय कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने जैसी सफलताओं ने पीड़ित परिवारों को उम्मीद की किरण दिखाई है। हालांकि, स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए थरूर ने नरेंद्र मोदी सरकार से यह पुरजोर मांग की है कि बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की पूरी टीम और भारी सामान उठाने वाले उन्नत हेलिकॉप्टरों को तुरंत सेवा में लगाया जाए। उन्होंने अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, मलबे के नीचे दबे हुए जीवित लोगों के बचने की उम्मीद और संभावना दोनों ही लगातार कम होती जा रही हैं। इसलिए, यह अत्यंत आवश्यक है कि हमारी बचाव कोशिशें इस आपदा के वास्तविक पैमाने और भीषण गंभीरता के बिल्कुल अनुरूप हों ताकि अधिक से अधिक जिंदगियों को बचाया जा सके।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
