समंदर में मौत का साया, फिर भी नहीं डगमगाए कदम: मिसाइल और बारूदी सुरंगों के बीच से LPG टैंकर भारत लाए दो जांबाज भारतीय।
होर्मुज जलडमरूमध्य में मिसाइल हमलों और बारूदी सुरंगों के बीच से 92,000 टन LPG सुरक्षित भारत लाए कैप्टन सुखमीत और धीरज। जानें जांबाज भारतीय नाविकों की पूरी कहानी।

Shadow of death in the sea, yet steps did not falter
समुद्र में बारूदी सुरंगे, मिसाइल हमले, होर्मुज से LPG टैंकर्स निकाल भारत लाए पंजाब के सुखमीत और ओडिशा के धीरज
अहमदाबाद/कांडला | 18 मार्च, 2026
दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री व्यापार मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में जहाँ युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, वहाँ दो भारतीय नौसेना कमांडरों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। पंजाब के सुखमीत सिंह और ओडिशा के धीरज कुमार अग्रवाल ने अपनी जान जोखिम में डालकर दो विशाल एलपीजी (LPG) टैंकरों को सुरक्षित रूप से भारतीय बंदरगाहों तक पहुँचाया है। इन जांबाज कप्तानों की वजह से ही भारत के लाखों घरों में रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है।
मिसाइल और ड्रोन के साये में सफर
मर्चेंट नेवी कमांडर के रूप में सुखमीत और धीरज के लिए यह यात्रा किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो कभी एक शांत व्यापार मार्ग था, अब एंटी-शिप बारूदी सुरंगों, ड्रोन हमलों और मिसाइलों के खतरे से घिरा हुआ है। भारी सैन्य हमलों और असुरक्षा के कारण ये दोनों जहाज एक सप्ताह से अधिक समय तक होर्मुज के पश्चिम में फंसे रहे। अनिश्चितता के इस माहौल में भी दोनों कप्तानों ने हार नहीं मानी और सही मौके का इंतजार कर जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला।
भारत पहुँचे 'शिवालिक' और 'नंदा देवी'
- शिवालिक (LPG Carrier): कैप्टन सुखमीत सिंह के नेतृत्व में 'शिवालिक' सोमवार को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुँचा। इस जहाज पर 27 नाविक सवार थे।
- नंदा देवी (LPG Carrier): कैप्टन धीरज कुमार के नेतृत्व में 'नंदा देवी' मंगलवार तड़के गुजरात के कांडला बंदरगाह (वंदीनार सुविधा केंद्र) पर सुरक्षित पहुँचा। इस जहाज पर 30 नाविकों का दल तैनात था।
इन दोनों जहाजों के जरिए कुल 92,000 मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी भारत लाई गई है। इसमें से 'नंदा देवी' अकेले लगभग 46,000 मीट्रिक टन गैस लेकर पहुँचा है।
जहाजरानी मंत्री ने बताया 'गुमनाम नायक'
केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस सफल मिशन के बाद दोनों जहाजों के चालक दल के साथ वर्चुअल बातचीत की। उन्होंने नाविकों की सराहना करते हुए कहा, "समुद्री यात्री वैश्विक व्यापार के गुमनाम नायक हैं। अपने घरों और परिवारों से दूर रहकर आपने यह सुनिश्चित किया कि देश के लिए आवश्यक माल सुरक्षित पहुँचे। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आपकी शांति और सतर्कता मिसाल है।"
जहाजरानी सचिव विजय कुमार ने भी नाविकों के कर्तव्य बोध की प्रशंसा की और बताया कि हमलों के कारण यातायात ठप होने के बावजूद भारतीय नाविकों ने अपनी जिम्मेदारी को सर्वोपरि रखा।
परिवारों का डर और नाविकों का संकल्प
- सुखमीत सिंह (पंजाब, आदमपुर): सुखमीत के परिवार ने बताया कि खराब हालातों को देखते हुए उन्होंने सुखमीत को ड्यूटी छोड़ने की सलाह दी थी। लेकिन सुखमीत ने जवाब दिया कि देश के लिए महत्वपूर्ण माल वापस लाना उनकी जिम्मेदारी है और वे काम पूरा करके ही घर लौटेंगे।
- धीरज कुमार अग्रवाल (ओडिशा, कांटाबांजी): धीरज के परिवार के लिए पिछला एक हफ्ता बेहद तनावपूर्ण रहा। ओडिशा के बालांगीर जिले के रहने वाले धीरज के परिजनों ने 'नंदा देवी' के सुरक्षित जलडमरूमध्य पार करने के बाद ही चैन की सांस ली।
भारतीय नाविकों का वैश्विक डंका
विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि वर्तमान में लगभग 3.2 लाख भारतीय नाविक हैं, जिनमें से 90% विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर कार्यरत हैं। यह आंकड़ा भारतीय नाविकों की वैश्विक क्षमता और मांग को दर्शाता है। सुखमीत और धीरज जैसे कमांडरों ने साबित कर दिया है कि मुश्किल वक्त में भी भारतीय पेशेवर दुनिया के किसी भी कोने में अपना तिरंगा बुलंद रख सकते हैं।
युद्धग्रस्त इलाकों से ऊर्जा संसाधनों को सुरक्षित लाना केवल एक पेशेवर काम नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा है। सुखमीत और धीरज के इस साहस ने न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती दी है, बल्कि दुनिया भर में भारतीय नाविकों के सम्मान को भी बढ़ाया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
