क्या खतरे में है ग्राहकों का पर्सनल डेटा?SBI डेटा लीक मामले में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सख्त कार्रवाई की मांग|
सीपीआई-एम सांसद एए रहीम ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर एसबीआई ग्राहकों के डेटा लीक मामले की जांच और साइबर सुरक्षा मजबूत करने का आग्रह किया।

एसबीआई ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर लीक होने की खबरों के बाद सीपीआई-एम सांसद द्वारा स्वतंत्र जांच की मांग के संदर्भ में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर लीक होने की खबरों के बाद एक बड़ा मामला सामने आया है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए सीपीआई-एम के राज्यसभा सदस्य ए.ए. रहीम ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सीधे हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर एसबीआई ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने की खबरों की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
डार्क वेब पर लीक की खबर और अलर्ट
हाल ही में आई रिपोर्टों के अनुसार, डार्क वेब पर मौजूद डेटा में एसबीआई के लगभग 3,897 ग्राहकों के ऐसे रिकॉर्ड की पहचान की गई है, जिनमें उनकी निजी पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। बैंक को इस संदिग्ध डेटा लीक के संबंध में 16 अक्टूबर को अलर्ट प्राप्त हुए थे। यह सूचना बैंक को उसके 'थ्रेट इंटेलिजेंस सर्विस प्रोवाइडर', 'डिफेंस साइबर एजेंसी' और 'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम' (CERT-In) के माध्यम से मिली थी। इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को भी काम पर लगाया गया है।
कौन-कौन सी जानकारियां हुईं लीक?
रिपोर्ट्स में सामने आया है कि जिन जानकारियों के लीक होने की बात कही जा रही है, उनमें ग्राहकों के नाम, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, जन्म तिथि, ईमेल आईडी और घर का पता शामिल है। इसके अलावा, ब्रांच की जानकारी, कस्टमर इंफॉर्मेशन फाइल (CIF) आइडेंटिफायर तथा लोन और लीड रिकॉर्ड से जुड़ा मेटाडेटा भी इसमें शामिल है।
सांसद ने जताई गहरी चिंता
राज्यसभा सांसद ए.ए. रहीम ने देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के पास मौजूद ग्राहकों की निजी सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह संवेदनशील जानकारी गलत हाथों में चली जाती है, तो आम ग्राहकों को 'आइडेंटिटी थेफ्ट' (पहचान की चोरी), टारगेटेड फिशिंग, वित्तीय धोखाधड़ी और धोखाधड़ी के लिए किसी और का रूप धारण करने जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है। सांसद ने विशेष रूप से ध्यान दिलाया कि पेंशनभोगी, मजदूर, छोटे व्यापारी और समाज के अन्य कमजोर वर्ग के लोग इस प्रकार के साइबर खतरों से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
बैंक का पक्ष और सांसद का तर्क
मामला सामने आने पर एसबीआई का कहना है कि इस घटना से उसके मुख्य बैंकिंग कामकाज या बिजनेस की निरंतरता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है और सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। हालांकि, सांसद ए.ए. रहीम ने तर्क दिया कि बैंकिंग सेवाओं में कोई रुकावट न आने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि ग्राहकों की निजी जानकारी लीक होने का मामला गंभीर नहीं है। निजी डेटा का लीक होना अपने आप में एक बेहद गंभीर विषय है।
वित्त मंत्रालय से की गई प्रमुख मांगे
सांसद ए.ए. रहीम ने वित्त मंत्रालय और केंद्रीय वित्त मंत्री से इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
- स्वतंत्र जांच और समय-सीमा: संदिग्ध डेटा लीक के मुख्य स्रोत और इसके वास्तविक दायरे का पता लगाने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा के भीतर स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- ग्राहकों को सीधी सूचना: जिन 3,897 या अन्य ग्राहकों का डेटा प्रभावित हुआ है, उन्हें सीधे इस बात की सूचना दी जाए।
- मदद के लिए आसान माध्यम: बैंक ग्राहकों के लिए ऐसे सरल और सुलभ माध्यम तैयार करे, जहाँ वे किसी भी संदिग्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट तुरंत कर सकें और आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकें।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: जांच के परिणामों और सुरक्षा में सुधार के लिए उठाए गए कदमों को पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, जहाँ भी लापरवाही या सुरक्षा में चूक पाई जाए, वहाँ कड़ी जवाबदेही तय की जाए।
- सभी सरकारी बैंकों की सुरक्षा समीक्षा: इस मुद्दे को केवल एसबीआई तक सीमित न रखते हुए, वित्त मंत्रालय देश के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) में साइबर सुरक्षा उपायों की व्यापक समीक्षा करे। इसके तहत रियल-टाइम में खतरों का पता लगाने की क्षमता और डेटा-एक्सेस कंट्रोल को और अधिक मजबूत किया जाए।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
