आधी रात को होटल से बाहर! कश्मीर का नाम सुनते ही बदला होटल मालिक का बर्ताव, बीजेपी नेता ने बयां किया दर्द
महाराष्ट्र के एक होटल में कश्मीरी पहचान के कारण कथित भेदभाव का आरोप लगाने वाले जम्मू-कश्मीर भाजपा नेता साजिद युसुफ शाह।

एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर हाथ में माइक थामे भाषण देते हुए जम्मू-कश्मीर भाजपा के मीडिया इंचार्ज साजिद युसुफ शाह|
श्रीनगर/छत्रपति संभाजीनगर: जम्मू-कश्मीर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मीडिया इंचार्ज साजिद युसुफ शाह ने महाराष्ट्र के एक होटल पर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए हैं। साजिद युसुफ शाह का दावा है कि महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व नाम औरंगाबाद) प्रवास के दौरान उन्हें केवल उनकी कश्मीरी पहचान के कारण एक होटल से आधी रात को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले नागरिकों की क्षेत्रीय पहचान और उनके साथ होने वाले बर्ताव को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। घटना के सार्वजनिक होने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है।
पीड़ित बीजेपी नेता साजिद युसुफ शाह के अनुसार, वह आधिकारिक और निजी कारणों से महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर दौरे पर थे। काफी प्रयासों के बाद उन्हें स्थानीय स्तर पर एक होटल में ठहरने के लिए कमरा आवंटित किया गया था। परंतु होटल में विधिवत चेक-इन करने के महज एक घंटे के भीतर ही प्रबंधन का रवैया पूरी तरह बदल गया। होटल प्रशासन ने उनसे तुरंत कमरा खाली करने और होटल परिसर छोड़ने का आग्रह किया। साजिद ने सोशल मीडिया पर इस कड़वे अनुभव को साझा करते हुए लिखा कि होटल के मालिक का व्यवहार हालांकि विनम्र था, लेकिन उसने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि यह निर्णय केवल उनकी कश्मीरी पहचान से जुड़ी चिंताओं के कारण लिया गया है। होटल प्रबंधन ने इस कार्रवाई के पीछे कथित तौर पर उच्च अधिकारियों या सरकारी निर्देशों के पालन किए जाने की मजबूरी बताई।
बीजेपी मीडिया इंचार्ज ने इस पूरे प्रकरण को किसी भी नागरिक की क्षेत्रीय अस्मिता पर चोट बताया है। उन्होंने कहा कि दशकों से अनगिनत कश्मीरी नागरिकों ने जम्मू-कश्मीर और शेष भारत के बीच के संबंधों को मजबूत और प्रगाढ़ करने के लिए निस्वार्थ काम किया है। अधिकांश भारतीयों ने हमेशा कश्मीरियों का गर्मजोशी और सम्मान के साथ स्वागत किया है, लेकिन इस तरह की छिटपुट घटनाएं यह दर्शाती हैं कि कुछ रूढ़िवादी सोच और अवांछित आशंकाएं आज भी समाज में मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना को सार्वजनिक करने का उद्देश्य किसी के प्रति द्वेष फैलाना या सहानुभूति बटोरना नहीं है, बल्कि यह याद दिलाना है कि कानून भले ही देश को कागजों पर एकजुट कर सकते हैं, लेकिन दिलों में आपसी भरोसा और समझ विकसित करने में अभी भी लंबा समय लगेगा।
इस घटना के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कुछ इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने साजिद युसुफ शाह की आलोचना भी की। आलोचनाओं का दृढ़ता से जवाब देते हुए बीजेपी नेता ने स्पष्ट किया कि यह मामला उनकी व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं का नहीं है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं सक्षम हैं और किसी भी महंगे या फाइव-स्टार होटल में ठहरने की व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन असल चिंता उस आम कश्मीरी यात्री की सुरक्षा और गरिमा को लेकर है जो केवल एक साधारण होटल का खर्च वहन कर सकता है। क्या देश के किसी भी नागरिक को उसके मूल स्थान के कारण देर रात असुरक्षित महसूस कराया जाना उचित है?
इस संवेदनशील मामले पर विपक्षी दलों ने भी राज्य सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनीश गवांडे ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और राज्य की संस्कृति के विपरीत बताया है। गवांडे ने कहा कि महाराष्ट्र की भूमि छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे महान दूरदर्शियों के प्रगतिशील आदर्शों पर आधारित है, जहां मेहमानों के साथ ऐसा भेदभाव कतई स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने और दोषी होटल प्रबंधन के खिलाफ आवश्यक हस्तक्षेप करने की जोरदार अपील की है।

Lalita Rajput
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