मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पास नहर में डूब रहे बच्चे के लिए देवदूत बनकर पहुंचे सफाई कर्मचारी सागर, अदम्य साहस के लिए पुलिस देगी सम्मान।

राजधानी दिल्ली के मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के समीप शुक्रवार दोपहर एक ऐसी घटना घटी जिसने समाज में इंसानियत और अदम्य साहस की एक नई परिभाषा लिख दी है। जब काल बनकर बहती नहर दो मासूम जिंदगियों को अपने आगोश में समाने की कोशिश कर रही थी, तब एक साधारण से दिखने वाले सफाई कर्मचारी ने वह कर दिखाया जो किसी चमत्कार से कम नहीं था। उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के सिविल लाइंस जोन में तैनात सफाई कर्मचारी सागर कुमार ने अपनी जान की परवाह न करते हुए उफनती नहर में रस्सी के सहारे एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालकर उसे नया जीवन दिया। यह घटना न केवल एक साहसिक बचाव अभियान है, बल्कि यह उस निस्वार्थ सेवा भाव का प्रमाण है जो अक्सर वर्दी और ओहदे से परे आम नागरिक के भीतर जीवित रहता है।

घटना के विवरण के अनुसार, 33 वर्षीय सागर कुमार रोजाना की भांति वजीराबाद से अपनी हाजिरी लगाकर आदर्श नगर स्थित अपने गांव बढ़ोला की ओर लौट रहे थे। जब वे मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पास से गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर नहर के किनारे शोर मचाते कुछ डरे हुए बच्चों पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सागर तुरंत किनारे पर पहुंचे और देखा कि दो बच्चे गहरे पानी में डूब रहे हैं और अपनी अंतिम सांसों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बिना एक पल की देरी किए, सागर ने अपनी जान दांव पर लगाने का फैसला किया। उन्होंने तुरंत पास पड़ी एक रस्सी का इंतजाम किया और उसे डूब रहे बच्चों की ओर फेंक दिया। अपने सटीक प्रयास और अदम्य साहस के बल पर सागर एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रहे। हालांकि, उन्होंने दूसरे बच्चे को बचाने के लिए भी एड़ी-चोटी का जोर लगाया, लेकिन दुर्भाग्यवश 12 साल का वह मासूम पानी के तेज बहाव में बह गया।

सागर की इस बहादुरी की चर्चा आज पूरी दिल्ली में हो रही है, लेकिन इस 'असली हीरो' के मन में आज भी एक गहरी टीस बाकी है। सुरक्षित निकाले गए बच्चे के परिवार ने जहां सागर को अपनी दुआओं में जगह दी है और उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया है, वहीं सागर स्वयं को उस दूसरे बच्चे को न बचा पाने के लिए दुखी महसूस कर रहे हैं। सागर ने नम आंखों से बताया कि उन्होंने अपनी तरफ से हर संभव कोशिश की थी, लेकिन कुदरत को शायद कुछ और ही मंजूर था। आदर्श नगर के बढ़ोला गांव के निवासी सागर अपनी ढाई साल की छोटी बेटी, पत्नी और माता-पिता के साथ रहते हैं। उनकी इस जांबाजी ने यह सिद्ध कर दिया है कि एक साधारण परिवार से आने वाला व्यक्ति भी असाधारण परिस्थितियों में समाज का सबसे बड़ा रक्षक बन सकता है।

स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था ने भी सागर के इस साहसिक कार्य को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने सागर के साहस और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की जमकर सराहना की है। पुलिस अधिकारियों ने औपचारिक रूप से घोषणा की है कि सागर को उनके इस निस्वार्थ मानवतावादी कार्य के लिए जल्द ही एक विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान न केवल सागर के लिए गौरव की बात होगी, बल्कि यह समाज के अन्य नागरिकों के लिए भी एक प्रेरणा बनेगा कि संकट के समय में किसी की जान बचाने के लिए केवल संसाधन नहीं, बल्कि मजबूत इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।

मजलिस पार्क की इस घटना ने जहां एक ओर संबंधित विभागों की सुरक्षा संबंधी कमियों पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं सागर जैसे जांबाज के रूप में समाज को एक नई उम्मीद भी दी है। सुरक्षित निकाला गया बच्चा आज अपने परिवार के साथ है, जिसका श्रेय केवल सागर के अदम्य साहस को जाता है। यह घटना इस संदेश के साथ समाप्त होती है कि मानवता आज भी जीवित है और जब तक सागर जैसे निस्वार्थ भाव वाले लोग समाज में मौजूद हैं, तब तक किसी भी डूबती उम्मीद को एक सहारा मिलने की संभावना हमेशा बनी रहेगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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