S-400 बना रूस का नया हमला हथियार! यूक्रेन पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर मचाई तबाही|
रूस ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल कर यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिससे कीव ओब्लास्ट क्षेत्र में भारी असर पड़ा है।

रूस द्वारा S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की मदद से यूक्रेन में जमीनी ठिकानों पर हमला किए जाने के संदर्भ में।
रूस ने अपनी सैन्य रणनीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए यूक्रेन के खिलाफ हवाई सुरक्षा के लिए बनाए गए एस-400 (S-400) एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल जमीन पर मौजूद ठिकानों पर हमला करने के लिए किया है। हाल ही में रूसी वायुसेना ने यूक्रेन पर एक साथ दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर सनसनी फैला दी। यूक्रेनी वायु सेना ने इन मिसाइलों को 'इस्कंदर-एम और एस-400' कैटेगरी में रखा है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि रूस अब अपनी पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों का उपयोग आक्रामक जमीनी हमलों के लिए भी कर रहा है। रूस द्वारा किए गए इस हमले का सबसे ज्यादा असर कीव ओब्लास्ट क्षेत्र पर पड़ा है, जहां भारी तबाही देखने को मिली है। युद्ध के दौरान पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक कम होने की वजह से यूक्रेन का एयर डिफेंस सिस्टम रूसी हमलों को रोकने में पूरी तरह विफल रहा और वह एक भी मिसाइल को हवा में नहीं गिरा पाया।
विशेष तौर पर एस-400 सिस्टम को जमीन पर मौजूद लक्ष्यों पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि आसमान से आने वाली मिसाइलों और विमानों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने के लिए डिजाइन किया गया था। मूल रूप से यह एक एयर डिफेंस सिस्टम है, लेकिन रूस ने इसके कमांड सॉफ्टवेयर में तकनीकी बदलाव कर इसे एक नई दिशा दी है, ताकि इसे बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर जमीन के लक्ष्यों की ओर दागा जा सके। रूस सोवियत काल के बचे हुए और अपनी सेवा अवधि पूरी कर चुके एस-300 और एस-400 इंटरसेप्टर मिसाइल स्टॉक का उपयोग जमीनी हमलों के लिए कर रहा है। यह सिस्टम वर्टिकल कोल्ड लॉन्च तकनीक का उपयोग करता है, जिससे मिसाइल बिना लॉन्चर को घुमाए सीधे ऊपर उठकर तय किए गए जमीनी कोऑर्डिनेट्स की तरफ मुड़ जाती है।
यह पहली बार नहीं है जब रूस ने इस तरह का कोई अनोखा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। इससे पहले 2022 में भी उसने फ्रंट लाइन के पास के यूक्रेनी कस्बों में पुरानी एस-300 सरफेस-टू-एयर मिसाइलों का जमीनी हमलों के लिए इस्तेमाल किया था। बाद में सामने आई रिपोर्टों से इस बात की पुष्टि हुई थी कि रूस ने नई 48एन6 (48N6) मिसाइलों का इस्तेमाल किया है, जो एस-300 और एस-400 के बाद के वर्शन के साथ काम करने में सक्षम हैं। इसके बाद 2026 में रूस ने अपने हथियारों के जखीरे में आरएम-48यू (RM-48U) को शामिल किया और रिटायर हो चुकी सरफेस-टू-एयर मिसाइलों को बदलकर इस नई मिसाइल का बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है। यूक्रेन की डिफेंस इंटेलिजेंस के अनुसार, रूस ने साल 2025 में करीब 200 आरएम-48यू मिसाइलें तैयार की थीं, जबकि 2026 में उसने 480 से ज्यादा मिसाइलें बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। हालांकि, एक नियमित बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में एयर डिफेंस मिसाइलों की विनाशकारी क्षमता थोड़ी कम होती है, फिर भी इनका जमीनी स्तर पर असर काफी विनाशकारी साबित हो रहा है।
सैनिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रणनीति का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ये मिसाइलें दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को आसानी से भ्रम में डाल देती हैं। हालांकि, इसका एक बड़ा नुकसान यह है कि इन मिसाइलों में जमीनी हमलों के लिए आवश्यक सटीक गाइडेंस और भारी वॉरहेड की कमी होती है, जिससे यह पारंपरिक सामरिक मिसाइलों की तुलना में कम सटीक और आम नागरिकों के लिए बेहद खतरनाक साबित होती हैं। इस पूरी रणनीतिक हलचल और रूस द्वारा एस-400 के इस प्रकार के अप्रत्याशित उपयोग पर वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों की पैनी नजर बनी हुई है, क्योंकि यह आधुनिक युद्धकौशल और रक्षा उपकरणों के पारंपरिक इस्तेमाल के समीकरणों को पूरी तरह से बदल रहा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
