अंतरराष्ट्रीय मंच पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक दबावों की परवाह न करते हुए भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से मिलने वाले रियायती कच्चे तेल की खरीद में अप्रत्याशित तेजी ला दी है। एक हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर रूस से जीवाश्म ईंधन और हाइड्रोकार्बन खरीदने के मामले में दुनिया भर में दूसरे स्थान पर मजबूती से बरकरार है। इस व्यापारिक रणनीतिक कदम ने न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के समीकरणों को भी पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (CREA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय तेल आयात के ग्राफ में एक बड़ा उछाल देखा गया है। रिपोर्ट बताती है कि पिछले महीने की तुलना में भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में आठ प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह रूस से होने वाले आयात में आया इक्कीस प्रतिशत का मासिक उछाल है। वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो भारत ने केवल एक महीने की अवधि में रूस से अनुमानित पांच दशमलव आठ अरब यूरो, जो कि भारतीय मुद्रा में लगभग चौंसठ हजार करोड़ रुपये बैठते हैं, के हाइड्रोकार्बन का आयात किया है।

इस विशाल आयात खेप के घटकों पर नजर डालें तो भारत द्वारा रूस से की गई कुल खरीद में सबसे बड़ा और मुख्य हिस्सा कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का रहा है। कुल हिस्सेदारी का लगभग तिरासी प्रतिशत हिस्सा, जिसकी कीमत चार दशमलव आठ अरब यूरो आंकी गई है, केवल कच्चे तेल के रूप में भारत पहुंचा है। इसके अतिरिक्त, अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत ने रूस से पांच सौ पचास मिलियन यूरो मूल्य के प्रसंस्कृत तेल उत्पादों और चार सौ उनतीस मिलियन यूरो मूल्य के उच्च गुणवत्ता वाले कोयले का भी आयात किया है, जो देश के औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

इस अवधि के दौरान देश के प्रमुख तटीय और औद्योगिक रिफाइनिंग हब में रूसी कच्चे तेल की डिलीवरी में अभूतपूर्व तेजी देखी गई है। गुजरात स्थित वाडिनर रिफाइनरी में अनलोड किए गए तेल की मात्रा में पिछले महीने के मुकाबले छत्तीस प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में यह डिलीवरी चौदह प्रतिशत तक बढ़ गई। निजी क्षेत्र के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की सरकारी रिफाइनरियों ने भी अपनी रणनीतिक खरीद का दायरा व्यापक किया है। न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने, जिन्होंने कुछ समय के लिए रूसी तेल का आयात रोक दिया था, दोबारा खरीद शुरू करते हुए क्रमशः तेरह प्रतिशत और बयालीस प्रतिशत का मासिक उछाल दर्ज किया है। वहीं, ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी ने पिछले दो वर्षों में रूसी कच्चे तेल की अपनी अब तक की सबसे बड़ी खेप अनलोड करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

यूक्रेन संकट के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा मॉस्को पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों ने वैश्विक व्यापारिक मार्गों को पुनर्निर्धारित कर दिया था। पश्चिमी देशों के विरोध के बावजूद भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए रूस को अपना मुख्य ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बनाए रखा है। हालांकि भारत मध्य पूर्व, अफ्रीका और अमेरिका से भी तेल आयात कर अपने स्रोतों में विविधता ला रहा है, फिर भी देश के कुल क्रूड बास्केट में रूसी तेल की हिस्सेदारी सबसे मजबूत बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर रूसी तेल के कुल निर्यात में चीन पचास प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत छत्तीस प्रतिशत के साथ दूसरे, तुर्की छह प्रतिशत के साथ तीसरे और यूरोपीय संघ पांच प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर मौजूद है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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