पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी गहरी जागरूकता और अथक प्रयासों के दम पर पांच साल के रुद्रांश उपाध्याय ने एक नई मिसाल कायम की है। पंचकूला के निवासी इस नन्हे पर्यावरण प्रेमी को नई दिल्ली में आयोजित 'वृक्ष मित्र कार्यक्रम' के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विशेष रूप से सम्मानित किया। रुद्रांश की असाधारण लगन और प्रकृति के प्रति उनके प्रेम ने न केवल उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को प्रभावित किया, बल्कि उन्हें देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा के रूप में स्थापित कर दिया है।

रुद्रांश उपाध्याय ने पर्यावरण के प्रति अपने समर्पण को एक मिशन का रूप देते हुए अब तक कुल 1,455 पौधे लगाए हैं। इन पौधों की न केवल उन्होंने रोपाई की है, बल्कि इनकी निरंतर देखभाल भी सुनिश्चित की है, जिसके चलते इनमें से 1,427 पौधे अभी भी फल-फूल रहे हैं। मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले और वर्तमान में पंचकूला में अपने पिता ज्ञानेंद्र उपाध्याय के साथ रहने वाले रुद्रांश हर रविवार कम से कम सात पौधे लगाने का अपना व्यक्तिगत संकल्प बड़ी निष्ठा से पूरा करते हैं। इस कार्य में वे पौधों की प्रजाति, स्थान और उनकी वर्तमान स्थिति का एक विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार करते हैं, जो उनकी गंभीरता और योजनाबद्ध कार्यशैली को दर्शाता है।

रुद्रांश के इस अभियान को 'रुद्रांश ग्रीन मिशन' (RGM) का नाम दिया गया है। दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जब रुद्रांश ने मंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष अपने अभियान का डिजिटल ब्यौरा पेश किया, तो उनकी बारीकी और पौधों की निगरानी के प्रति अटूट लगन देखकर मंत्री काफी प्रभावित हुए। सराहना स्वरूप मंत्री ने न केवल उन्हें मंच पर आमंत्रित किया, बल्कि उन्हें 10,000 रुपये नकद पुरस्कार और एक पौधा प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने रुद्रांश के इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दी।

रुद्रांश का यह सफर साबित करता है कि पर्यावरण को बचाने और हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। उनके द्वारा अपनाई गई पद्धतियां न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर रही हैं, बल्कि अन्य बच्चों और नागरिकों को भी प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रेरित कर रही हैं। एक ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, रुद्रांश जैसे छोटे बच्चों का योगदान आशा की एक नई किरण जगाता है। उनकी निरंतरता और अनुशासन ही वह शक्ति है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और टिकाऊ कल का आधार तैयार कर रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story