आज 1 मार्च, 2026 की तारीख दुनिया के लिए एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण और चिंताजनक दिन है। मध्य पूर्व (Middle East) में अचानक बढ़े सैन्य तनाव ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को हिला दिया है, बल्कि वहां रह रहे हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और पूरे क्षेत्र में जारी विस्फोटों के बीच, भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

क्या है ताजा इवैक्यूएशन प्लान?

भारत के इजरायल में राजदूत (Envoy) जेपी सिंह ने हाल ही में एनडीटीवी (NDTV) से बात करते हुए साफ कर दिया है कि सरकार अपने नागरिकों को वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा:

  • "दूतावास ने फिर से एक एडवायजरी जारी की है। हम उनके निकलने की योजना मिस्र (Egypt) या जॉर्डन (Jordan) के रास्ते बना रहे हैं, जो भी रास्ता उस समय सबसे सुरक्षित होगा, और जैसे ही हमें निकासी के लिए एक 'खिड़की' (सुरक्षित समय) मिलेगी, हम काम शुरू कर देंगे।"

हालांकि, अभी स्थिति बहुत नाजुक है। राजदूत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में सड़क यात्रा करना सुरक्षित नहीं है, इसलिए नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे तब तक इंतजार करें जब तक कि कोई स्पष्ट सुरक्षित रास्ता न मिल जाए।

भारतीयों के लिए दूतावास की गाइडलाइन्स

इजरायल, ईरान, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत और कतर स्थित भारतीय मिशनों ने अपने नागरिकों के लिए अलग-अलग एडवायजरी जारी की है। इन निर्देशों का पालन करना इस समय जीवन रक्षक हो सकता है:

  • शेल्टर के पास रहें: सभी भारतीयों को सलाह दी गई है कि वे अपने निवास स्थान या कार्यस्थल के पास बने 'डेजिग्नेटेड शेल्टर' (सुरक्षित शरणस्थल) की जानकारी रखें और उनके करीब ही रहें।
  • अनावश्यक यात्रा से बचें: युद्ध और हवाई हमलों के दौरान सड़क पर निकलना खतरनाक हो सकता है। दूतावास ने सभी से अनावश्यक यात्रा न करने का आग्रह किया है।
  • सतर्क रहें: स्थानीय अधिकारियों और 'होम फ्रंट कमांड' (इजरायल) द्वारा जारी निर्देशों का अक्षरश: पालन करें।
  • संपर्क में रहें: अपनी सुरक्षा के लिए दूतावास द्वारा दिए गए हेल्पलाइन नंबरों को अपने पास रखें और अपडेट्स के लिए दूतावास के सोशल मीडिया हैंडल्स पर नजर बनाए रखें।

तनाव का दायरा और भारतीयों की संख्या

मध्य पूर्व केवल इजरायल तक सीमित नहीं है। ईरान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर जैसे देशों में भी भारी संख्या में भारतीय रहते हैं। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, जनवरी 2026 तक ईरान में करीब 10,000 भारतीय और इजरायल में लगभग 41,000 भारतीय नागरिक रह रहे थे।

इनमें छात्र, पेशेवर और पर्यटक सभी शामिल हैं। जब हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद हो जाते हैं, तो इन सभी लोगों के लिए वापस आना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। भारत सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि चाहे वह यूक्रेन का संकट हो या अन्य कोई अंतरराष्ट्रीय आपदा, भारत ने हमेशा 'वंदे भारत मिशन' या विशेष विमानों के जरिए अपने नागरिकों को सुरक्षित घर पहुंचाया है।

कूटनीतिक कोशिशें: भारत का रुख

भारत का रुख इस पूरे मामले में बहुत संतुलित रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में ईरान और इजरायल दोनों देशों के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की है। भारत ने सभी पक्षों से 'अधिकतम संयम' बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की है। भारत का स्पष्ट मानना है कि किसी भी देश की संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

धैर्य और संयम ही सबसे बड़ा बचाव है

हम समझते हैं कि इस समय इजरायल और ईरान में रह रहे भारतीयों और उनके परिवारों के लिए यह समय बेहद डरावना है। लेकिन घबराहट में लिया गया कोई भी फैसला स्थिति को और बिगड़ सकता है।

अतीत में हमने देखा है कि जब भी भारतीय दूतावास ने एडवायजरी जारी की है, तो उसका पालन करने वाले नागरिक अधिक सुरक्षित रहे हैं। फिलहाल, सबसे जरूरी यह है कि आप दूतावास की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करें। दूतावास की टीमें रात-दिन काम कर रही हैं और जैसे ही स्थिति में थोड़ा भी सुधार होगा, निकासी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


यह संघर्ष केवल एक देश या दो देशों का नहीं है, इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वहां रह रहे आम लोगों पर पड़ रहा है। इस कठिन समय में, भारत की पूरी मशीनरी अपने नागरिकों के साथ खड़ी है।

हम उम्मीद करते हैं कि जल्द ही कूटनीतिक बातचीत से स्थिति सामान्य होगी और सभी भारतीय सुरक्षित अपने घरों को लौट सकेंगे। तब तक, सतर्क रहना, धैर्य रखना और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना ही एकमात्र विकल्प है।

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