बिहार के दरभंगा जिले के जमालपुर थाना क्षेत्र स्थित मुसहरिया गांव की बेटी और मध्य प्रदेश कैडर की 1990 बैच की सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराधा शंकर ने एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रशासनिक दक्षता और विधिक सूझबूझ का परिचय दिया है। प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्ति के उपरांत भी उनकी सक्रियता और विशेषज्ञता का दायरा निरंतर बढ़ रहा है। वे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार हेतु तैयार की गई महत्वपूर्ण अनुशंसाओं के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

भारत के मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा एक पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था। इस प्रतिष्ठित समिति में सदस्य के रूप में अनुराधा शंकर को सम्मिलित किया गया। समिति ने देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, प्रभावी और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से व्यापक सुझाव और अनुशंसाएं तैयार की हैं। इन अनुशंसाओं को वर्तमान में राष्ट्रीय विधिक हलकों में एक गंभीर और सार्थक चर्चा का विषय माना जा रहा है, जो भविष्य में न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव का आधार बन सकती हैं।

अनुराधा शंकर का इस उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति में चयन यह प्रमाणित करता है कि पुलिस सेवा के अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने जो प्रशासनिक अनुभव और बौद्धिक क्षमता अर्जित की, उसकी महत्ता आज भी देश की सर्वोच्च संस्थाओं के लिए अपरिहार्य है। उनकी दूरदर्शी सोच और नीति-निर्माण में उनकी स्पष्टता ने उन्हें एक ऐसी विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है, जिस पर राष्ट्र निर्माण के विषयों में पूर्ण विश्वास किया जाता है।

प्रशासनिक और न्यायिक सुधारों के मोर्चे पर सक्रिय रहने के साथ-साथ, वे वैश्विक मंचों पर भी भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वर्तमान में, वे स्विट्जरलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय पीस कॉन्फ्रेंस में भाग ले रही हैं। वहां वे शांति, न्याय और सुशासन जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक विषयों पर अपने विचार रख रही हैं और वैश्विक विमर्श में भारत की उपस्थिति को सशक्त बना रही हैं। एक पूर्व पुलिस अधिकारी के रूप में उनका यह अंतरराष्ट्रीय सफर उनकी विद्वता के व्यापक आयामों को दर्शाता है।

दरभंगा की माटी से जुड़ीं अनुराधा शंकर की यह उपलब्धियां संपूर्ण मिथिलांचल के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण हैं। उन्होंने न केवल एक अनुशासित आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, बल्कि सेवानिवृत्ति के पश्चात भी राष्ट्र सेवा के अपने संकल्प को निरंतर जारी रखा है। उनकी सफलता की यह यात्रा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो यह सिद्ध करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर ज्ञानार्जन के माध्यम से व्यक्ति राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के परे भी अपनी सार्थक छाप छोड़ सकता है। मिथिला की बेटी के रूप में उनकी यह उपलब्धि संपूर्ण क्षेत्र के लिए गर्व का एक बड़ा प्रतीक बन गई है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story