रविशंकर प्रसाद का LIVE बयान — ‘बंगाल में ED की छापेमारी लोकतंत्र की रक्षा के तहत’
रविशंकर प्रसाद ने बंगाल में ED की I-PAC छापेमारी पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है, मनी लॉन्ड्रिंग एवं कोयला तस्करी जांच हेतु की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, अमित शाह व प्रतीक जैन समेत सभी पक्षों के नाम लेकर कहा कि संविधान और कानून का पालन सर्वोपरि है।

नई दिल्ली, 9 जनवरी 2026। आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) की पश्चिम बंगाल में I-PAC एवं उसके प्रमुख प्रतीक जैन के घर व कार्यालय पर चल रही छापेमारी को लेकर **वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिक्रिया दी, जिसने राजनीतिक गलियारे से लेकर कानूनी अदालतों तक का माहौल गर्माई दिया है। प्रेस कांफ्रेंस केंद्रीय राजधानी में पहले से प्रमुख सुर्खियों का विषय बनी हुई इस कार्रवाई का सटीक सरकारी रुख स्पष्ट करती है।
प्रसाद ने अपने संबोधन की शुरुआत अचानक और उच्च राजनीतिक संवेदनशीलता वाले इस मामले को लेकर किया। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई कानून के दायरे में और मान्यता प्राप्त प्रावधानों के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला तस्करी जैसे संगठित अपराधों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में स्पष्ट किया कि ED के अधिकारी सबूत और दस्तावेज़ इकट्ठा कर रहे हैं, जो जांच के लिए अनिवार्य हैं, और यह कार्रवाई केंद्र सरकार की कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
रविशंकर प्रसाद ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रतीक जैन समेत अन्य संबंधित लोगों के नाम लेते हुए कहा कि इस छापेमारी से संबंधित कोई भी पक्ष कानून से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि ED की कार्रवाई “संपूर्ण पारदर्शिता” और “कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप” है और कोई भी व्यक्ति या संस्था अपने राजनीतिक हितों के लिए इस जांच को बदनाम नहीं कर सकती। प्रसाद ने यह भी दोहराया कि केंद्रीय एजेंसियों का उद्देश्य केवल विधिक साक्ष्य एकत्र करना और न्यायिक लंबित मामलों को निष्पक्ष तरीके से सुलझाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में हो रही ED जांच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या चुनावी मौसम से प्रेरित नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चल रही मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला तस्करी जैसे आरोपों पर केंद्रित जांच है। प्रसाद ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए विश्लेषण किया कि बेलगाम भ्रष्टाचार और अवैध धन के प्रवाह पर नियंत्रण करना राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है, और इसीलिए एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से जांच करने का अधिकार और कर्तव्य प्राप्त है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रविशंकर प्रसाद ने उन आलोचनाओं का भी उल्लेख किया, जिन्हें टीएमसी नेताओं और विपक्षी समूहों ने उठाया है, जिनका कहना है कि ED कार्रवाई के पीछे राजनीतिक प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आलोचना की जगह है, लेकिन कानून की अवमानना या एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का मार्ग नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी आरोप के सामने आने पर वह जनता के सामने प्रस्तुत होना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी का विषय बनना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, प्रसाद ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र सरकार कानून का पालन सुनिश्चित करती है और किसी भी संस्था या व्यक्ति को कानून के बाहर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी जांच में निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाता है, और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ही एजेंसियों की कार्रवाई हो रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के समापन में रविशंकर प्रसाद ने कहा कि यह कार्रवाई केवल एक कानूनी जांच है, न कि राजनीतिक प्रेरित कार्रवाई। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील है कि वे कानून के शासन और संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करें, और किसी भी अप्रत्यक्ष प्रयास से न्यायिक प्रक्रिया में विघ्न न डालें। इस बयान ने देश के राजनीतिक और न्यायिक दृष्टिकोण से इस मामले की गंभीरता को दर्शाया, क्योंकि यह न केवल बंगाल बल्कि समग्र रूप से केंद्र-राज्य संबंधों में कानूनी और संवैधानिक संतुलन के सवाल को भी उभार रहा है।

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