13,500 किलो वजनी रावण, 44 लाख की लागत – क्या इतना खर्च मिटा पाएगा समाज की बुराई?
पुतले की बनावट को और भव्य बनाने के लिए इसके मुकुट की ऊँचाई 58 फीट रखी गई है। हाथ में पकड़ी तलवार 50 फीट लंबी है, जबकि पैरों में पहनाई गई जूतियाँ 40 फीट की ऊँचाई की हैं।

कोटा। विजयादशमी का पर्व इस बार राजस्थान के कोटा में इतिहास रचने जा रहा है। यहाँ कल दुनिया के सबसे विशाल रावण का दहन किया जाएगा, जिसकी ऊँचाई 221.5 फीट है। यह पुतला न केवल आकार में अद्वितीय है, बल्कि इसकी विशेष बनावट, तकनीकी उपयोग और भव्यता ने इसे वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। हालाँकि, इस भव्य आयोजन के बीच पर्यावरण, सामाजिक ज़िम्मेदारी और अनावश्यक खर्च जैसे गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं, जो समाज और संस्कृति के बीच संतुलन की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं।
आयोजकों के अनुसार इस विशालकाय रावण के निर्माण में 13,500 किलो सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इसकी कुल लागत लगभग 44 लाख रुपये बताई जा रही है। इसे खड़ा करने के लिए करोड़ों रुपये की लागत वाली 100 टन और 80 टन क्षमता वाली क्रेनें लगाई गईं। इतना ही नहीं, इसे विशेष रूप से वाटरप्रूफ बनाया गया है ताकि बारिश या तूफान भी इसकी संरचना को प्रभावित न कर सके।
पारंपरिक बांस और धातु संरचना को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। रंग-बिरंगे वस्त्र, सजावट और प्रकाश व्यवस्था ने इस पुतले को और भी आकर्षक बना दिया है। आयोजकों का दावा है कि इस तरह का रावण आज तक कहीं और नहीं बनाया गया।
पुतले की बनावट को और भव्य बनाने के लिए इसके मुकुट की ऊँचाई 58 फीट रखी गई है। हाथ में पकड़ी तलवार 50 फीट लंबी है, जबकि पैरों में पहनाई गई जूतियाँ 40 फीट की ऊँचाई की हैं। रावण के इस विराट स्वरूप को देखकर दर्शक विस्मित हुए बिना नहीं रहेंगे।
आतिशबाज़ी के लिए इसमें 25 रिमोट कंट्रोल्ड सिस्टम लगाए गए हैं। आयोजन समिति के अनुसार इस बार आतिशबाज़ी के दृश्य पहले से कहीं अधिक भव्य होंगे। एक के बाद एक धमाकेदार इफेक्ट्स पूरे आसमान को रोशन करेंगे और कोटा का गांधी मैदान दिवाली की तरह जगमगा उठेगा।
रावण दहन को भारतीय संस्कृति में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जब इस आयोजन पर 44 लाख रुपये से अधिक खर्च हो रहा हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। एक ओर इसे परंपरा और आस्था से जोड़कर देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर इतना विशाल पुतला जलाने से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण और संभावित दुर्घटनाओं की चिंता भी अनदेखी नहीं की जा सकती।
विशेषज्ञों का कहना है कि 13,500 किलो वजनी इस पुतले के जलने से उत्पन्न धुआँ और रासायनिक आतिशबाज़ी वातावरण को प्रभावित कर सकती है। साथ ही इतने बड़े ढांचे के दहन से उत्पन्न मलबा और गिरने वाली संरचनाओं से हादसों का ख़तरा भी बढ़ सकता है।
समिति के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस बार का रावण केवल संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि विश्व रिकॉर्ड बनाने का भी प्रयास है। यह आयोजन न सिर्फ़ राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है। लेकिन दूसरी ओर आलोचकों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में संस्कृति से ज़्यादा प्रतिस्पर्धा का भाव दिखाई देता है।
देशभर में विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन होते हैं, परंतु कोटा का यह आयोजन अपनी ऊँचाई और भव्यता के कारण खास है। सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा पुतला जलाना हमारी परंपरा को और समृद्ध करेगा या केवल प्रतियोगिता की भावना को ही बढ़ावा देगा?
इतने विशाल आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने भी विशेष तैयारियाँ की हैं। फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस और सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित की गई है। नगर निगम ने आतिशबाज़ी और मलबे के प्रबंधन के लिए विशेष दल बनाए हैं। आयोजकों का दावा है कि सभी एहतियात बरते गए हैं और दर्शकों की सुरक्षा सर्वोपरि रहेगी।
कोटा में होने वाला यह रावण दहन निस्संदेह इतिहास में दर्ज होगा। 221.5 फीट ऊँचा यह पुतला दुनिया का सबसे बड़ा होने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कारीगरी का संगम है। लेकिन इस भव्य आयोजन के बीच यह सवाल भी उतना ही अहम है कि क्या इतना बड़ा आयोजन समाज में बुराई के खात्मे का वास्तविक संदेश दे पाएगा, या यह केवल एक प्रतिस्पर्धा बनकर रह जाएगा?

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
