भारत के अलग-अलग हिस्सों में विजयादशमी और रावण दहन को लेकर कई अनोखी परंपराएं और प्रथाएं प्रचलित हैं। देश में कई ऐसी जगहें हैं जहाँ रावण दहन की परंपरा नहीं होती, बल्कि इसके बजाय रावण की पूजा की जाती है। इन स्थानों में महाराष्ट्र के अकोला जिले का सांगोला गांव भी शामिल है, जहाँ रावण की बकायदा पूजा की जाती है और पूरा गांव इस उत्सव में शामिल होता है।

अकोला से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में एक ही पत्थर से बनी रावण की मूर्ति स्थापित है। इस प्रतिमा में रावण को दस सिरों वाले राजा के रूप में और हथियारों के साथ दर्शाया गया है। इस गांव में दशहरे के दिन रावण का दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। गांव में रावण की पूजा करने के पीछे ग्रामीणों का मानना है कि रावण में जहां कुछ दुर्गुण थे, वहीं उसमें कई सद्गुण भी मौजूद थे। इसलिए रावण को सिर्फ घृणा की दृष्टि से देखने के बजाय, उसके दुर्गुणों को छोड़कर उसके अच्छे गुणों को अपनाना चाहिए। रावण के इन्हीं अच्छे गुणों को स्वीकार करते हुए यहाँ के ग्रामीण परंपरागत रूप से उसकी पूजा करते आ रहे हैं।

यह प्रतिमा गांव के प्रवेश द्वार पर स्थित है। इस प्रतिमा को गांव के दूसरी ओर स्थापित किया जाना था, लेकिन प्रतिमा को गांव की सीमा से आगे ले जाना संभव नहीं हो सका। आखिरकार, ग्रामीणों ने गांव के प्रवेश द्वार पर ही इसकी स्थापना कर दी। आज भी यहाँ के पुजारी प्रतिदिन इस प्रतिमा की पूजा करते हैं, जिसके पीछे ग्रामीणों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

गांव के पुजारी बालकृष्ण जाधव ने बताया कि यहाँ यह मूर्ति सैकड़ों वर्ष पुरानी है। उनके गुरुजी ने उन्हें बताया था कि रावण की मूर्ति को दूसरी जगह से एक बैलगाड़ी में लाया जा रहा था। जिस वक्त इस मूर्ति को ले जाया जा रहा था, उस समय यह इस गांव के स्थान से आगे नहीं बढ़ पाई। इसलिए गांव के लोगों ने मूर्ति की स्थापना यहीं पर कर दी। उन्होंने बताया कि शनिवार के दिन नारियल के तेल से पूजा की जाती है और धूप-दीप व अगरबत्ती लगाई जाती है।

प्रतिमा की स्थापना को लेकर एक स्थानीय युवक ने बताया कि माना जाता है कि 200 या 300 साल पहले गांव में इस मूर्ति की स्थापना हुई थी। पास में स्थित चिखल गांव में इस मूर्ति को बनाया गया था। जब वहां से मूर्ति को दूसरी जगह ले जाया जा रहा था, तब पास से गुजरने वाली नदी से थोड़ी दूर पर मूर्ति आगे नहीं बढ़ी|इसके बाद गांव वालों ने इसी गांव में मूर्ति की स्थापना कराई और तभी से यहाँ नियमित रूप से मूर्ति पूजन किया जाता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

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