अयोध्या में राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच को लेकर प्रशासनिक हलचल काफी तेज हो गई है। इस बहुचर्चित मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने अपनी प्रक्रिया का दायरा काफी हद तक बढ़ा दिया है। अब इस जांच को केवल हालिया वित्तीय वर्षों तक सीमित न रखकर, सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के शुरुआती समय यानी वर्ष 2020 तक विस्तारित कर दिया गया है। इस कदम के बाद से मंदिर प्रबंधन और संबंधित विभागों में हड़कंप मच गया है, और पुराने कर्मचारियों से लेकर नए कर्मियों तक से पूछताछ का सिलसिला शुरू हो चुका है।

इस पूरे प्रकरण की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में उच्चतम न्यायालय की ओर से राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद पर ऐतिहासिक फैसला आया था। अदालत ने अपने निर्देश में केंद्र सरकार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट का गठन करने और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा कराने का आदेश दिया था। इसी निर्देश के अनुपालन में वर्ष 2020 में 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' का औपचारिक गठन किया गया था। ट्रस्ट के अस्तित्व में आने के बाद मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से शुरू हुआ और पहले चरण का निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत 22 जनवरी 2024 को नए भव्य मंदिर में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी।

हालांकि, मंदिर निर्माण के दो साल के भीतर ही दान राशि में गड़बड़ी और चोरी का मामला सामने आने के बाद स्थिति गंभीर हो गई। राम मंदिर ट्रस्ट के विशेष अनुरोध पर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व में पहले एक तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। इस शुरुआती एसआईटी ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 से जुड़े लेखा-जोखा और दस्तावेजों की गहन पड़ताल की थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आईजी किरण एस के नेतृत्व वाली एसआईटी ने इस जांच के दायरे को और व्यापक बनाते हुए ट्रस्ट के गठन के शुरुआती दौर यानी वर्ष 2020-21 से लेकर अब तक के सभी वित्तीय दस्तावेजों और विवरणों की जांच शुरू कर दी है।

जांच के इस नए चरण में अधिकारियों ने न केवल मौजूदा कर्मियों बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के बाद से अब तक कार्य कर चुके पुराने कर्मचारियों को भी तलब किया है। अनुपालन क्षेत्राधिकारी कार्यालय में इन सभी से अलग-अलग और सिलसिलेवार सवाल पूछे जा रहे हैं तथा उनके विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य बयानों में किसी भी प्रकार के विरोधाभासी तथ्यों से बचना और दूध का दूध, पानी का पानी करना है। इससे पहले भी दान राशि की गणना में लगे लगभग आधा दर्जन कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है, लेकिन अब एसआईटी ने 2020-21, 2021-22, 2022-23 और 2023-24 से संबंधित तमाम दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है।

इस बीच, दान राशि की गणना की पूरी व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। बैंक प्रबंधन की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी के कड़े अनुपालन के तहत, दान राशि की गिनती के काम में अब सेना से सेवानिवृत्त हुए 10 बैंककर्मियों को तैनात किया गया है। बैंक प्रबंधन ने दान गणना के कार्य में पूरी तरह से पारदर्शिता और ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए यह कड़ा फैसला लिया है। पहले जहां इस कार्य में 12 कर्मियों की टीम लगाई जाती थी, वहीं अब व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरस्त बनाने के लिए फिलहाल 10 पूर्व सैन्य बैंककर्मियों को इस जिम्मेदारी पर भेजा गया है। एसआईटी की इस बढ़ती सक्रियता और दस्तावेजों की गहराई से हो रही छानबीन से यह स्पष्ट है कि प्रशासन इस मामले की तह तक जाकर हर एक सच को सामने लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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