राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा अपडेट, 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट, चंपत राय समेत 3 पूर्व पदाधिकारी बने गवाह|
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कोर्ट में 7278 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई है, जिसमें चंपत राय और अनिल मिश्र को आरोपी नहीं बल्कि गवाह बनाया गया है।

राम मंदिर दान चोरी मामले में चार्जशीट में गवाह बनाए गए चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव (बाएं से दाएं) अयोध्या में।
राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश की अयोध्या अदालत में एक बहुत बड़ी और अहम विकास प्रक्रिया सामने आई है। इस बहुचर्चित मामले में पुलिस ने अपनी लंबी जांच पूरी करने के बाद विशेष एंटी करप्शन कोर्ट में कुल 7278 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट यानी आरोप-पत्र दाखिल कर दिया है। इस चार्जशीट के सामने आने के बाद देश भर की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि इसमें किन-किन लोगों को आरोपी बनाया गया है और किन्हें राहत मिली है। इस मामले को लेकर अयोध्या से लेकर पूरे प्रशासनिक और न्यायिक गलियारों में काफी हलचल देखने को मिल रही है।
इस विशालकाय चार्जशीट के संबंध में सबसे बड़ी और राहत देने वाली खबर यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय बंसल, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को इस मामले में पूरी तरह से आरोपमुक्त कर दिया गया है। जांच अधिकारी और अयोध्या के क्षेत्राधिकारी (CO) आशुतोष तिवारी द्वारा कोर्ट में जमा की गई इस चार्जशीट में इन तीनों ही वरिष्ठ पदाधिकारियों को आरोपी के बजाय गवाह की महत्वपूर्ण भूमिका में रखा गया है। जांच अधिकारियों का स्पष्ट रूप से यह कहना है कि चूंकि ये सभी लोग मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी के रूप में कार्यरत रहे हैं और मूल रूप से ट्रस्ट की तरफ से ही इस संबंध में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत वे इस मुकदमे में गवाही देंगे।
इस चार्जशीट को अदालत में पेश करने की प्रक्रिया भी काफी चर्चा का विषय रही। बुधवार के दिन इस 7278 पन्नों के भारी-भरकम दस्तावेज को पांच बड़े बक्से में भरकर कोर्ट परिसर में लाया गया था। जैसे ही सुबह करीब साढ़े दस बजे अदालत में इस चार्जशीट के जमा होने की खबर फैली, वहां वकीलों और अन्य स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। अयोध्या पुलिस की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि इस पूरी चार्जशीट में केवल उन आठ आरोपियों को ही अभियुक्त बनाया गया है जो फिलहाल जेल के सलाखों के पीछे बंद हैं। इसके अलावा किसी भी अन्य नए व्यक्ति को इस चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अभियुक्त के दायरे में शामिल नहीं किया गया है।
इस पूरी जांच के दौरान पुलिस ने अपनी फाइल में कुल 101 पर्चे काटे हैं और अभियोजन पक्ष की मजबूती के लिए कुल 133 लोगों के बयानों को शामिल करते हुए गवाहों की सूची दाखिल की है। इस सूची में गोपाल राव, अनिल मिश्रा, चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन का नाम भी शामिल है। इसके साथ ही इस मामले की विवेचना औपचारिक रूप से समाप्त हो चुकी है। चार्जशीट में एक और महत्वपूर्ण संशोधन यह किया गया है कि आठों आरोपियों में से एक आरोपी सुभाष चंद्र श्रीवास्तव के पास से चोरी की गई रकम की कोई बरामदगी नहीं हो पाई थी, जिसके चलते उनके ऊपर से चोरी से जुड़ी धाराओं को हटा दिया गया है। अब अदालत में चार्जशीट जमा होने के बाद जेल में बंद सभी आरोपियों की हर 14 दिनों पर नियमित पेशी होगी, जिसके पूरा होने के बाद वे अपनी ज्यूडिशियल रिमांड की प्रक्रिया से मुक्त हो सकेंगे।
इस मामले में कानूनी और वकीलों के स्तर पर भी काफी गहमागहमी देखने को मिली। जैसे ही चार्जशीट दाखिल होने की बात बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा को पता चली, वे अन्य वकीलों के साथ तुरंत अदालत पहुंच गए। उन्होंने आरोप-पत्र का खुद अवलोकन करने की मांग की, जिसे लेकर शुरुआती दौर में कुछ असमंजस और हंगामा भी हुआ। हालांकि, बाद में अदालत ने बार एसोसिएशन की तरफ से गठित अधिवक्ताओं के विशेष पैनल को आरोप-पत्र का अवलोकन कराया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन द्वारा 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में दर्ज कराई गई शिकायत से हुई थी। उन्होंने अनुकल्प मिश्रा, करुणेश पांडेय, मनीष कुमार यादव, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ला और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ बीएनएसएस की कई गंभीर धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
जांच की जिम्मेदारी अयोध्या के सीओ आशुतोष तिवारी को सौंपी गई थी, जिन्होंने विभिन्न साक्ष्यों को जुटाया और आरोपियों को कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इस बीच, अयोध्या अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र और अन्य वरिष्ठ वकीलों जैसे फौजदारी प्रियनाथ सिंह, कृपाल चंद्र खरे और सौरभ मिश्रा ने अदालत के समक्ष यह पक्ष रखा कि चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन राव के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करके कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। वकीलों का यह तर्क था कि उन्होंने अपने साक्ष्यों के साथ शपथ पत्र भी विवेचक को सौंपा था, लेकिन विवेचक ने उन्हें गवाह के खाने में रखते हुए चार्जशीट पेश कर दी। एंटी करप्शन जज रजत वर्मा ने दोनों पक्षों की लंबी बहस और तर्कों को ध्यान से सुना, वकीलों के प्रार्थना पत्र का उचित निस्तारण किया और अंततः विवेचक द्वारा पेश की गई आठों आरोपियों की इस चार्जशीट पर अपना प्रसंज्ञान ले लिया।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
