भाजपा नेता ने वाशिंगटन में भारत की विदेश नीति और टैरिफ पर गलत दावे किए थे, जिसके बाद राहुल गांधी के तीखे हमले और भारी विवाद के चलते उन्होंने माफी मांगी।

Ram Madhav apology Hudson Institute Washington : अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विदेश नीति और ऊर्जा रणनीतियों को लेकर दिए गए एक विवादास्पद बयान ने देश की राजनीति और कूटनीतिक हलकों में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कूटनीतिक मामलों के जानकार राम माधव को अपने उस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी है, जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने के नाम पर भारत की तेल आयात नीति और टैरिफ रुख पर तथ्यात्मक रूप से गलत दावे किए थे। हडसन इंस्टीट्यूट जैसे प्रतिष्ठित मंच से दिए गए इस बयान ने न केवल भारत सरकार की 'ऊर्जा सुरक्षा' की घोषित नीति पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि विपक्ष को भी सरकार पर तीखे हमले करने का एक बड़ा अवसर दे दिया।

घटनाक्रम की शुरुआत 23 अप्रैल को वाशिंगटन स्थित हडसन इंस्टीट्यूट में एक कार्यक्रम के दौरान हुई, जहाँ राम माधव ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका के साथ तालमेल बिठाने के लिए रूस और ईरान से तेल आयात बंद कर दिया है और अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ को भी स्वीकार कर लिया है। उनके इस दावे ने तुरंत वैश्विक मीडिया का ध्यान खींचा, क्योंकि यह भारत की उस आधिकारिक स्थिति के ठीक विपरीत था जहाँ भारत अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद अपने राष्ट्रीय हितों और सस्ते ईंधन की उपलब्धता को प्राथमिकता देता आया है। इस बयान के सार्वजनिक होते ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे 'राष्ट्रीय समर्पण' करार देते हुए 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' पर कटाक्ष किया, जिससे यह मामला विशुद्ध रूप से कूटनीतिक से राजनीतिक रंग में बदल गया।

तथ्यों की पड़ताल और चौतरफा आलोचना के दबाव के बीच, राम माधव ने कुछ ही घंटों के भीतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण थे। आधिकारिक आंकड़े गवाह हैं कि 2022 के बाद से भारत ने रूस से तेल खरीद में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है, जिससे देश को अरबों डॉलर की बचत हुई है। इसके अलावा, भारत ने हाल ही में 2026 में ईरान के साथ भी कुछ आयात संबंधों को पुनर्जीवित किया है। टैरिफ के मुद्दे पर भी भारत ने कभी अमेरिकी शर्तों के आगे घुटने नहीं टेके, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंचों पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए रियायतों के लिए बातचीत जारी रखी है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक महाशक्तियों के बीच एक संतुलित विदेश नीति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। राम माधव की त्वरित माफी ने तात्कालिक कूटनीतिक नुकसान को तो सीमित कर दिया है, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए गए गलत बयान देश की छवि और आंतरिक सुरक्षा दोनों के लिए जोखिम भरे हो सकते हैं। यह पूरा घटनाक्रम इस बात पर मुहर लगाता है कि भारत के लिए उसकी ऊर्जा आत्मनिर्भरता और किफायती ईंधन की आपूर्ति सर्वोपरि है, जिससे किसी भी द्विपक्षीय दबाव में समझौता नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर कूटनीतिक चर्चाओं तक में गूंजता रहेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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