बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष राजन सिंह पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनवाने के प्रस्ताव और दिल्ली में 'मोदी चालीसा' का पाठ कराने को लेकर भारी विवादों में घिर गए हैं। लखनऊ में एक किन्नर एक्टिविस्ट की ओर से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के बाद उनके किन्नर होने पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह पूरा मामला इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

पटना में बिहार सरकार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने का प्रस्ताव देने वाले राजन सिंह अपने विभिन्न अभियानों और कानूनी विवादों को लेकर सुर्खियों में हैं। राजन सिंह का दावा है कि उन्होंने बोर्ड की बैठक में मंदिर के लिए पांच एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पास करवाकर कैबिनेट के पास भेजा है। हालांकि, बोर्ड की अन्य सदस्यों ने इस तरह के किसी भी आधिकारिक निर्णय से साफ इनकार किया है। इसी बीच, लखनऊ की एक एक्टिविस्ट द्वारा उनके खिलाफ फर्जी किन्नर होने और समुदाय की छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

अपने इस कदम के समर्थन में राजन सिंह का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए अभूतपूर्व कार्य किए हैं, जिसके चलते वे पटना में उनका मंदिर स्थापित करना चाहते हैं। अपनी इस मांग को मुखर करने के लिए उन्होंने दिल्ली के प्रेस क्लब में खुद से रचित 'मोदी चालीसा' का पाठ आयोजित किया और घोषणा की कि यह पाठ हर गुरुवार को जारी रहेगा तथा इसका आयोजन पटना में भी किया जाएगा। दूसरी ओर, बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य अनुप्रिया ने इन दावों का विरोध करते हुए स्पष्ट किया कि बोर्ड या समाज कल्याण विभाग की ऐसी कोई बैठक नहीं हुई थी और न ही ऐसा कोई निर्णय लिया गया था। उन्होंने इसे राजन सिंह की व्यक्तिगत आस्था या राजनीतिक लाभ हासिल करने की रणनीति बताया है।

लखनऊ के हजरतगंज थाने में किन्नर एक्टिविस्ट प्रियंका द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया है कि राजन सिंह असली किन्नर नहीं हैं और उनके इन अनूठे अभियानों से पूरे किन्नर समुदाय की प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इन तमाम आरोपों का जवाब देते हुए राजन सिंह ने खुद को एक वैध ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट धारक बताया है। उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने वाली एक्टिविस्ट को कांग्रेस से जुड़ा हुआ बताते हुए इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है। अपने पिछले सफर का जिक्र करते हुए राजन ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी और मेरठ से अपनी शिक्षा पूरी की है और राजनीतिक गलियारों में सक्रिय रहे हैं।

विवादों के बीच राजन सिंह के जीवन और सफर पर नजर डालें तो वे मूल रूप से सारण जिले के छपरा स्थित मड़बा बसैया गांव के रहने वाले हैं। उनका दावा है कि केंद्रीय गृह मंत्री की सलाह पर वे बिहार में सक्रिय हुए थे और उन्हें आठ अगस्त 2025 को बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। संसद में ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन बिल पारित होने के समय मार्च 2026 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा भी दिया था जिसे राज्यपाल ने स्वीकार नहीं किया था। इसके अलावा, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बिहार सरकार मंदिर निर्माण के लिए जमीन और राशि स्वीकृत नहीं करती है, तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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