'मराठी नहीं बोलने की हिम्मत आती कहां से है ?' ; पुणे में विरोधियों पर जमकर बरसे मनसे प्रमुख
पुणे में आयोजित वसंत व्याख्यानमाला के दौरान मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भाषाई स्वाभिमान, बाहरी हस्तक्षेप और राज्य की वर्तमान राजनीति पर तीखे प्रहार किए।

पुणे में 'वसंत व्याख्यानमाला' कार्यक्रम के दौरान मंच से 'मेरे सपनों का महाराष्ट्र' विषय पर अपना संबोधन देते हुए मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे।
Raj Thackeray Pune Speech : महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए पहचाने जाने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने एक बार फिर मराठी भाषा और अस्मिता के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। पुणे के प्रतिष्ठित 'वसंत व्याख्यानमाला' कार्यक्रम में 'मेरे सपनों का महाराष्ट्र' विषय पर बोलते हुए राज ठाकरे ने मराठी मानुष को अपनी भाषा के प्रति 'कट्टर' होने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक महाराष्ट्र का व्यक्ति अपनी भाषा के लिए संघर्ष नहीं करेगा, तब तक बाहरी लोग यहां आकर मराठी का अनादर करने की हिम्मत जुटाते रहेंगे।
मराठी भाषा और बाहरी हस्तक्षेप पर तीखा प्रहार :
राज ठाकरे ने अपने संबोधन में भाषाई गौरव का उदाहरण देते हुए पश्चिम बंगाल का एक वीडियो साझा किया और कहा कि अपनी भाषा के प्रति स्वाभिमान क्या होता है, यह बंगालियों से सीखा जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग मुंबई को 'बॉम्बे' कहते हैं या मराठी बोलने से इनकार करते हैं, उनमें इतनी हिम्मत आती कहां से है? राज ठाकरे ने तंज कसते हुए पूछा, "क्या यही लोग तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल में जाकर वहां की स्थानीय भाषा का अपमान करने की हिम्मत कर सकते हैं?" उन्होंने सिनेमा जगत में हिंदी के बढ़ते प्रभाव और रिक्शा चालकों के व्यवहार पर भी चिंता व्यक्त की और चेतावनी दी कि मनसे की 'बांबू' शैली ही इन्हें वश में रखती है।
सत्ताधारियों और जातिगत राजनीति पर निशाना :
महाराष्ट्र की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए राज ठाकरे ने राज्य के राजनेताओं को ही इस दुर्दशा का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कैबिनेट मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि एक मंत्री होने के बावजूद वह केवल एक विशिष्ट समुदाय के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने जनता को झकझोरते हुए कहा कि जब तक आप विरोध नहीं करेंगे, तब तक ऐसे लोगों का साहस बढ़ता रहेगा। इसके अलावा, उन्होंने महाराष्ट्र में कवियों, लेखकों और महापुरुषों को जाति के चश्मे से देखने की प्रवृत्ति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अफसोस जताया कि राजनीतिक लाभ के लिए महापुरुषों को जातियों में बांट दिया गया है, जिससे मराठी मानुष एकजुट नहीं हो पा रहा है।
आज पुण्यात पत्रकार वरुणराज भिडे स्मृती पुरस्कार २०२६ प्रदान सोहळा झाला. यावेळेस श्रीमती मृणालिनी नानिवडेकर, श्री. कमलेश सुतार, श्री. दीपक कांबळे, श्रीमती मिनाक्षी गुरव यांना माझ्या हस्ते पुरस्कार देण्यात आला. त्यावेळी माझं आजच्या पत्रकारितेबद्दलचं मनोगत व्यक्त केलं. pic.twitter.com/tBAPbqoXI7
— Raj Thackeray (@RajThackeray) April 29, 2026
विरासत का स्मरण और महापुरुषों का सम्मान :
अपने भाषण के दौरान राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के गौरवशाली इतिहास और आधुनिक निर्माताओं का भी उल्लेख किया:
- सी.डी. देशमुख और रघुनाथ माशेलकर : उन्होंने सी.डी. देशमुख के त्याग और रघुनाथ माशेलकर द्वारा हल्दी के पेटेंट के लिए अमेरिका से लड़ी गई कानूनी लड़ाई का जिक्र कर मराठी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
- यशवंतराव चव्हाण : महाराष्ट्र को प्रगति की राह पर ले जाने और कोयना बांध जैसे निर्माणों के लिए उन्होंने प्रथम मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण के योगदान को सर्वोपरि बताया।
- बाळासाहेब ठाकरे : उन्होंने गर्व से कहा कि हिंदुओं को गर्व से मतदान करने के लिए प्रेरित करने वाले पहले व्यक्ति हिंदू हृदय सम्राट बाळासाहेब ठाकरे ही थे।
- शरद पवार : वैचारिक मतभेदों के बावजूद, उन्होंने स्वीकार किया कि शरद पवार ने महाराष्ट्र में बागवानी (Horticulture) के क्षेत्र में जो क्रांति की है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
