छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लाभांडी स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब नागरिकों के जीवन पर भारी पड़ने लगा है। यहाँ के निवासियों को पिछले कई हफ्तों से सीवरेज मिश्रित दूषित पानी पीने के लिए विवश होना पड़ रहा है, जिसके कारण इलाके में पीलिया, टाइफाइड और डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नल से निकलने वाला पानी न केवल मटमैला है बल्कि उससे दुर्गंध भी आ रही है, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए 'जहर' समान साबित हो रहा है।

कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के लिए स्वच्छ पेयजल एक सपना बन गया है। लाभांडी के इस प्रोजेक्ट में सीवरेज लाइनों और पेयजल लाइनों के आपस में मिल जाने की शिकायतें लंबे समय से की जा रही थीं, लेकिन समय पर सुधार कार्य न होने के कारण स्थिति अनियंत्रित हो गई है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र से दर्जनों लोग तेज बुखार, पेट दर्द और उल्टी-दस्त की शिकायतों के साथ नजदीकी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती हुए हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सर्वाधिक है, जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे इस संक्रमण का जल्दी शिकार हो रहे हैं।

धरातल पर स्थिति यह है कि लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए निजी टैंकरों या दूर-दराज के हैंडपंपों पर निर्भर हैं, जो आर्थिक और शारीरिक रूप से उनके लिए कष्टकारी है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि प्रशासन और नगर निगम को बार-बार अवगत कराने के बावजूद केवल अस्थायी आश्वासन ही मिले हैं। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की विफलता और पाइपलाइनों में रिसाव ने इस आवासीय परिसर को बीमारियों का केंद्र बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें इलाके में सैंपल लेने तो पहुँच रही हैं, लेकिन मुख्य समस्या—दूषित जलापूर्ति—का समाधान अब भी अधर में लटका है।

कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से, नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नगर निगम और संबंधित विकास प्राधिकरण का अनिवार्य दायित्व है। छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा की अनदेखी पर कड़े प्रावधान हैं। निवासियों ने अब चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पाइपलाइनों की मरम्मत कर शुद्ध पानी की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और कानूनी कार्रवाई का मार्ग अपनाने को मजबूर होंगे। लाभांडी की यह घटना शहरी नियोजन और रखरखाव की उन खामियों को उजागर करती है जो अंततः आम आदमी के अस्तित्व के लिए संकट बन जाती हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story