General Naravane : पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एम.एम. नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर सियासी और सार्वजनिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। संसद में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा इस किताब का उल्लेख किए जाने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा का केंद्र बन गया है। अब इस पूरे मामले में किताब के प्रकाशक पेंगुइन पब्लिकेशन की सफाई के बाद खुद जनरल नरवणे का भी पहला सार्वजनिक रिएक्शन सामने आया है।

पेंगुइन की सफाई के बाद नरवणे का संकेतात्मक बयान

पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पेंगुइन पब्लिकेशन के आधिकारिक बयान को रिट्वीट किया। इसके साथ उन्होंने संक्षेप में लिखा, “पुस्तक की वर्तमान स्थिति यही है।”

यह नरवणे की ओर से इस विवाद पर पहली प्रतिक्रिया मानी जा रही है, हालांकि उन्होंने किताब की सामग्री या आरोपों को लेकर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की।

प्रकाशक पेंगुइन ने क्या कहा?

इससे पहले पेंगुइन पब्लिकेशन ने बयान जारी कर स्पष्ट किया था कि घोषित किताब, प्री-ऑर्डर पर उपलब्ध किताब और प्रकाशित किताब—तीनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।

पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के अनुसार:

किताब अब तक प्रकाशित नहीं हुई है

अगर कहीं इसकी कोई हार्डकॉपी या डिजिटल कॉपी प्रसारित हो रही है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन है

ऐसी कॉपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी

कंपनी ने यह भी कहा कि प्री-ऑर्डर या किसी प्लेटफॉर्म पर लिस्टिंग को प्रकाशित होना नहीं माना जा सकता। किताब तभी प्रकाशित मानी जाती है जब वह औपचारिक रूप से दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक्री के लिए उपलब्ध हो।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

इस पूरे विवाद की जड़ लोकसभा से जुड़ी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में इस किताब की एक हार्डकॉपी दिखाते हुए दावा किया कि इसमें गलवान घाटी विवाद जैसे संवेदनशील विषयों का उल्लेख है, जो सरकार के लिए असहज करने वाले हो सकते हैं।

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि किताब उपलब्ध है और उन्होंने जनरल नरवणे के वर्ष 2023 के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया, जिसमें लिखा था कि उनकी किताब “अब उपलब्ध है” और साथ में खरीदने का लिंक भी साझा किया गया था।

राहुल गांधी का सवाल और सीधा आरोप

राहुल गांधी ने प्रकाशक पेंगुइन से सीधा सवाल करते हुए कहा कि यदि किताब प्रकाशित नहीं हुई, तो फिर वह कैसे उपलब्ध थी। उन्होंने टिप्पणी की कि या तो जनरल नरवणे गलत हैं या पेंगुइन। साथ ही राहुल गांधी ने यह भी कहा, “मुझे नहीं लगता कि जनरल नरवणे झूठ बोलेंगे।”

मामले का महत्व

यह विवाद अब केवल एक किताब तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें संसद, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय, प्रकाशन अधिकार और कॉपीराइट कानून जैसे अहम पहलू भी जुड़ गए हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पेंगुइन और लेखक की ओर से आगे कोई विस्तृत स्पष्टीकरण आता है या यह मामला कानूनी मोड़ लेता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story