कांग्रेस सांसद और रायबरेली से लोकसभा सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि के एक अहम मामले में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट आज अपना फैसला सुना सकती है। यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब बेंगलुरु में आयोजित एक जनसभा के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ एक आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उस समय सुल्तानपुर के भाजपा जिला उपाध्यक्ष रहे विजय मिश्रा ने इस बयान से आहत होकर स्थानीय कोर्ट में मानहानि का केस दायर कर दिया था। यह मामला 4 अगस्त 2018 को एमपी-एमएलए कोर्ट में दर्ज हुआ था, जिसके बाद 16 दिसंबर 2018 को अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

लगभग आठ वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब इस मामले में फैसला आने की घड़ी आ गई है। बीते 13 अक्टूबर को इस मामले की अंतिम बहस पूरी हो चुकी थी, जिसके बाद अदालत ने राहुल गांधी को फैसले के दिन व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का सख्त आदेश दिया था। इसी निर्देश के तहत राहुल गांधी नई दिल्ली से सुल्तानपुर कोर्ट में पेश होने के लिए रवाना हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों से ठीक पहले आ रहे इस न्यायिक फैसले पर पूरे देश के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों की भी गहरी निगाहें टिकी हुई हैं। राहुल गांधी के सुल्तानपुर पहुंचने पर स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा शहर में लगभग आठ अलग-अलग जगहों पर उनके स्वागत की खास तैयारियां की गई हैं। इससे पहले राहुल गांधी साल 2024 में भी इस सिलसिले में सुल्तानपुर कोर्ट आए थे, जब उन्होंने 20 फरवरी 2024 को पहली बार अदालत में पेश होकर अपनी जमानत कराई थी।

अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी जोरदार दलीलें रखीं। बचाव पक्ष की ओर से राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ल ने लिखित बहस के दौरान उनके द्वारा बयान दिए जाने की बात को तो स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी सफाई दी कि उस बयान को गलत तरीके से तोड़-मरोड़कर पेश किया गया था। वकील का यह भी कहना था कि राहुल गांधी का वह भाषण पूरी तरह से सद्भावपूर्ण था और इस आधार पर उन पर मानहानि का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। इसके जवाब में परिवादी के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने अपनी कानूनी दलीलें पेश करते हुए कई अहम न्यायिक फैसलों का हवाला दिया। पूरी अदालती कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ने खुद को पूरी तरह से निर्दोष बताया और अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को एक राजनीतिक साजिश करार दिया। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोर्ट अपने इस फैसले में क्या रुख अपनाता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story