Data Rollover India : भारत के डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहां डेटा को 'नया तेल' (New Oil) माना जा रहा है, वहीं दूरसंचार कंपनियों की मनमानी नीतियों पर अब संसद में सवाल उठने लगे हैं। राज्यसभा के 'शून्य काल' (Zero Hour) के दौरान आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद राघव चड्ढा ने देश के 115 करोड़ मोबाइल उपभोक्ताओं के हितों का मुद्दा उठाते हुए टेलीकॉम दिग्गजों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने प्रतिदिन मिलने वाले डेटा कोटा के समाप्त होने यानी 'डेटा लैप्स' होने की प्रक्रिया को उपभोक्ता अधिकारों का हनन करार दिया।

'खरीदा हुआ डेटा आखिर गायब क्यों?' – चड्ढा का तीखा प्रहार :

राघव चड्ढा ने सदन में जियो (Jio), एयरटेल (Airtel) और वीआई (Vi) जैसी दिग्गज कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए एक बेहद व्यावहारिक उदाहरण पेश किया। उन्होंने तर्क दिया कि यदि कोई ग्राहक पेट्रोल खरीदता है, तो वह तब तक उसका मालिक रहता है जब तक वह उसे खर्च न कर दे। लेकिन टेलीकॉम सेक्टर में स्थिति इसके विपरीत है। वर्तमान में, यदि कोई उपभोक्ता अपने दैनिक कोटा (जैसे 1.5GB या 2GB) का पूरी तरह उपयोग नहीं कर पाता, तो बचा हुआ डेटा आधी रात को अपने आप समाप्त हो जाता है। चड्ढा ने इस विसंगति को रेखांकित करते हुए पूछा कि जब ग्राहक ने पूरे डेटा का भुगतान किया है, तो अप्रयुक्त डेटा का लाभ उसे अगले दिन क्यों नहीं मिलता?

अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों के साथ सुधार का प्रस्ताव :

भारतीय दूरसंचार बाजार की विशालता का हवाला देते हुए, जहां प्रीपेड प्लान्स का बोलबाला है, चड्ढा ने वैश्विक स्तर पर प्रचलित सर्वोत्तम प्रथाओं का उल्लेख किया। उन्होंने तर्क दिया कि:

  • डेटा रोलओवर : अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड जैसे देशों की तर्ज पर भारत में भी बचे हुए डेटा को अगले दिन या अगले चक्र में जोड़ने की सुविधा मिलनी चाहिए।
  • डिजिटल संपत्ति का अधिकार : जिस तरह संपत्ति विरासत में दी जाती है, वैसे ही उपभोक्ताओं को अपना बचा हुआ डेटा अपने परिवार के साथ साझा करने का अधिकार मिलना चाहिए।
  • डिस्काउंट और रिफंड : जो ग्राहक डेटा का कम उपयोग करते हैं, उन्हें रिचार्ज पर विशेष छूट या क्रेडिट मिलना चाहिए।



विधिक पक्ष और उपभोक्ता संप्रभुता :

सांसद ने स्पष्ट किया कि 1.15 बिलियन ग्राहकों वाले इस विशाल बाजार में, कंपनियां केवल अपनी लाभप्रदता के आधार पर नियम तय नहीं कर सकतीं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि डेटा अब एक विलासिता नहीं बल्कि एक मौलिक आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में 'यूज़ इट और लूज़ इट' (उपयोग करो या खो दो) की नीति पारदर्शी व्यापारिक मूल्यों के खिलाफ है। उनके इस प्रस्ताव का उद्देश्य दूरसंचार नियामक संस्था (TRAI) और सरकार का ध्यान इस ओर खींचना है ताकि एक ऐसी नीति बनाई जा सके जो उपभोक्ताओं को उनकी गाढ़ी कमाई का पूरा मूल्य दिला सके।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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