अस्पताल का बिल नहीं भरा तो शव भी नहीं मिलेगा? राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाई सख्त कानून की मांग|
राज्यसभा में राघव चड्ढा ने निजी अस्पतालों द्वारा बिल बकाया होने पर मरीजों के शव न सौंपने का गंभीर मुद्दा उठाते हुए सख्त कानून की मांग की है।

संसद में बोलते हुए सांसद राघव चड्ढा निजी अस्पतालों द्वारा शव रोके जाने के मामले उठाते हुए।
राज्यसभा में सोमवार को निजी अस्पतालों द्वारा बिल का पूरा भुगतान न होने की स्थिति में मरीजों के शव परिजनों को न सौंपे जाने का बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला उठाया गया। संसद सदस्य राघव चड्ढा ने विशेष उल्लेख के जरिए इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से इस संबंध में एक प्रभावी और सख्त कानून बनाए जाने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज के समय में कुछ निजी अस्पतालों ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर इंसानों के शवों को जबरन वसूली का एक जरिया बना लिया है, जो कि अत्यंत चिंताजनक और निंदनीय है।
इस गंभीर विषय पर बात करते हुए राघव चड्ढा ने इसी साल जनवरी की एक घटना का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा की एक महिला को आपात स्थिति में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां महज दो घंटे के इलाज के बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद अस्पताल ने उनके शोक संतप्त परिवार को अस्सी हजार रुपये का लंबा-चौड़ा बिल थमा दिया। परिवार ने किसी तरह व्यवस्था करके सत्तावन हजार रुपये का भुगतान भी कर दिया, लेकिन तैंतीस हजार रुपये का बकाया रह गया। पीड़ित परिवार लगातार रोता रहा औरि मिन्नतें करता रहा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने बकाया राशि न मिलने के कारण शव देने से साफ इनकार कर दिया और तो और, अस्पताल ने परिवार की गाड़ी तक रोकने की धमकी दे डाली।
संसद में आगे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि आखिरकार पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही अस्पताल ने शव और मृत्यु प्रमाण पत्र परिजनों को सौंपा। चड्ढा ने सदन को यह भी याद दिलाया कि यह किसी एक निजी अस्पताल या इक्का-दुक्का घटना की कहानी नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई हृदय विदारक खबरें सामने आ चुकी हैं। इस तरह की अमानवीय घटनाओं को रोकने के लिए पूर्व में उच्चतम न्यायालय के निर्देश भी आ चुके हैं, इसके बावजूद धड़ल्ले से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि इस विषय पर एक कठोर कानून लाया जाए ताकि कोई भी अस्पताल बिल बकाया होने का हवाला देकर किसी भी मृत व्यक्ति के शव को रोकने का दुस्साहस न कर सके।
संसद के इस सत्र के दौरान विशेष उल्लेख के माध्यम से कई अन्य सदस्यों ने भी लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने महत्वपूर्ण मुद्दे सदन के पटल पर रखे। भाजपा के दिनेश शर्मा ने नकली दवाइयों से जुड़ा गंभीर मुद्दा उठाया और इसे केवल धोखाधड़ी या चोरी का मामला न बताकर एक संगठित अपराध का जाल करार दिया, जो नागरिकों के जीवन के साथ-साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी भारी क्षति पहुंचा रहा है। इसके अलावा, भाजपा के केसरी देव सिंह झाला ने बच्चों द्वारा मोबाइल फोन पर अत्यधिक समय बिताए जाने की समस्या का जिक्र करते हुए इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने की मांग की। वहीं, भाजपा की कल्पना सैनी ने ई-कचरे के बढ़ते खतरे और उसके वैज्ञानिक तथा प्रभावी तरीके से निपटान की आवश्यकता पर जोर दिया। इस प्रकार, संसद के इस सत्र में स्वास्थ्य, जनहित, बाल कल्याण और पर्यावरण से जुड़े कई अहम मामलों पर गंभीर चर्चा देखने को मिली।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
