केंद्र सरकार ने दिल्ली के कृषि भवन परिसर में बनी करीब एक सदी पुरानी कदीमी मस्जिद को हटाने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस मामले को लेकर सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक आधिकारिक हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें इस ऐतिहासिक ढांचे को हटाने के पीछे की पूरी वजह साफ की गई है। आइए जानते हैं कि इस पूरे विवाद और मस्जिद के इतिहास से जुड़े तथ्य क्या हैं।

सरकार ने हाईकोर्ट में क्या तर्क दिए?

दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में केंद्र सरकार ने बताया है कि कृषि भवन परिसर में स्थित इस मस्जिद को हटाना क्यों जरूरी है। सरकार के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना: यह पूरी कार्रवाई 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना' का एक अहम हिस्सा है, जिसके तहत कृषि भवन और शास्त्री भवन की पुरानी जगहों पर 'कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' की अत्याधुनिक और नई इमारतें बनाई जानी हैं।
  • राष्ट्रीय महत्व की जमीन: यह पूरी जमीन पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में है और यह एक राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है।
  • धर्मनिरपेक्ष स्वरूप: सरकार का यह भी तर्क है कि सरकारी दफ्तरों या परिसरों के भीतर किसी भी स्थायी धार्मिक ढांचे का बने रहना सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष (Secular) स्वरूप के अनुकूल नहीं है।

इसके अलावा, सरकार ने अदालत में यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन को किसी भी धार्मिक स्थल के लिए हमेशा के लिए आरक्षित नहीं किया जा सकता और न ही कृषि भवन या केंद्रीय सचिवालय परिसर के अंदर इस मस्जिद के एवज में कोई दूसरी जगह देने के लिए सरकार बाध्य है। हालांकि, विकल्प के रूप में सरकार ने इंडिया गेट के पास स्थित 'शाही मस्जिद (जब्ता गंज)' का जिक्र किया है, जो कृषि भवन से करीब 2 किलोमीटर के दायरे में मौजूद है।

कोर्ट की टिप्पणी और सवाल

इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनीश दयाल ने केंद्र सरकार के सामने कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी रखे। अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या सरकारी परिसरों के भीतर धार्मिक संरचनाओं या वहां नमाज पढ़ने की सुविधाओं पर पूरी तरह रोक लगाने वाला कोई खास या विशिष्ट नियम मौजूद है। इसके साथ ही, कोर्ट ने विभिन्न धर्मों के लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं के बारे में भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

कदीमी मस्जिद का पुराना इतिहास

कृषि भवन परिसर में स्थित कदीमी मस्जिद काफी पुरानी है और इसके इतिहास के तार ब्रिटिश काल से जुड़े हैं:

  • लुटियंस दिल्ली के नक्शे में दर्ज: दस्तावेजों के मुताबिक यह मस्जिद लगभग 114 साल पुरानी है, जो साल 1912 या उससे भी पहले के लुटियंस दिल्ली के नक्शों में दर्ज मिलती है।
  • आजादी से पहले के दस्तावेज: कदीमी मस्जिद कमेटी और इस मामले से जुड़े याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस मस्जिद से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेज वर्ष 1945 तक के समय के मौजूद हैं, जो देश की आजादी से पहले के हैं।
  • वक्फ संपत्ति के रूप में अधिसूचना: दिल्ली वक्फ बोर्ड ने साल 1970 में इस कदीमी मस्जिद को औपचारिक रूप से 'वक्फ संपत्ति' के तौर पर अधिसूचित किया था।

फिलहाल यह पूरा मामला दिल्ली हाईकोर्ट के विचाराधीन है, जहां कानूनी प्रक्रिया और तर्कों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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