Priyanka Gandhi speech on Women Reservation Bill : भारतीय राजनीति के पटल पर महिला आरक्षण विधेयक को लेकर मची रार अब व्यक्तिगत कटाक्ष और नीतिगत मतभेदों के एक नए दौर में प्रवेश कर गई है। कांग्रेस की फायरब्रांड नेता प्रियंका गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथों लेते हुए एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने संसद के विशेष सत्र के दौरान सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि भले ही सदन के भीतर प्रधानमंत्री राहुल गांधी का मजाक उड़ाते नजर आते हों, लेकिन हकीकत में वे राहुल द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों और उनके विजन पर घर जाकर गहराई से विचार करते हैं। प्रियंका का यह बयान न केवल भाई-बहन के राजनीतिक तालमेल को दर्शाता है, बल्कि सत्ता पक्ष की रणनीतियों को भी चुनौती देता है।

प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक के लागू होने की प्रक्रिया, विशेषकर परिसीमन (Delimitation) को लेकर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार 2011 की पुरानी जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करने की जल्दबाजी में है, जो पूरी तरह से अनुचित है। प्रियंका के अनुसार, इतने व्यापक संवैधानिक बदलाव के लिए अद्यतन और ठोस आंकड़ों की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी पूरे विधेयक में साफ़ नजर आती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संसद के 50 प्रतिशत विस्तार का प्रस्ताव तो हवा में तैर रहा है, लेकिन धरातल पर स्पष्टता का भारी अभाव है। असम में हुए परिसीमन का उदाहरण देते हुए उन्होंने सीमांकन की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए।

इस राजनीतिक हमले की धार तब और तेज हो गई जब प्रियंका ने ओबीसी (OBC) वर्ग के हितों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार नई जनगणना कराने से इसलिए घबरा रही है क्योंकि इससे ओबीसी वर्ग के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक हो जाएंगे। प्रियंका के मुताबिक, सरकार जनता की 'आंखों में धूल झोंककर' इस वर्ग का हक छीनने का प्रयास कर रही है। गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यदि प्राचीन भारत के महान रणनीतिकार चाणक्य आज जीवित होते, तो वे भी सरकार की इन चालों को देखकर स्तब्ध रह जाते। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंशा साफ़ है, तो लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत क्यों नहीं लागू किया गया।

विधेयक के कानूनी और रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए प्रियंका गांधी ने इसे भाजपा द्वारा 'सत्ता बनाए रखने का एक हथकंडा' करार दिया। उनका तर्क है कि विपक्ष महिला आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से इसे चुनावी टाइमिंग और अस्पष्ट शर्तों के साथ पेश किया गया है, वह इसकी शुद्धता पर संदेह पैदा करता है। इस जोरदार प्रहार ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी चुनावों में महिला आरक्षण और ओबीसी जनगणना का मुद्दा एक बड़े राजनीतिक ध्रुवीकरण का केंद्र बनेगा। प्रियंका गांधी के इन तीखे तेवरों ने संसद से लेकर सड़कों तक एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसका सीधा असर देश की आधी आबादी के प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीति पर पड़ना तय है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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