President Murmu Darjeeling Visit : पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में आयोजित 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के दौरान एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली, जब देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक मंच से अपनी गहरी निराशा व्यक्त की। सम्मेलन के उद्घाटन के लिए पहुंचीं राष्ट्रपति ने न केवल आयोजन स्थल में किए गए अंतिम समय के बदलावों पर सवाल उठाए, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के किसी भी वरिष्ठ मंत्री की अनुपस्थिति को भी रेखांकित किया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं, जिससे इस मुद्दे ने तुरंत एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि आखिर क्यों इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम को एक विशाल मैदान, जिसमें 5 लाख से अधिक लोगों के बैठने की क्षमता थी, वहां से हटाकर बागडोगरा हवाई अड्डे के पास एक संकीर्ण और भीड़भाड़ वाले स्थान पर स्थानांतरित किया गया। उन्होंने इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की कि आयोजन स्थल के दुर्गम और छोटा होने के कारण दूर-दराज से आए हजारों आदिवासी समुदाय के लोग कार्यक्रम में शामिल होने से वंचित रह गए। राष्ट्रपति का यह बयान सीधे तौर पर आयोजन के कुप्रबंधन की ओर इशारा करता है, जो संताल संस्कृति और जनजातीय विरासत के प्रति प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठाता है।

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कमी को महसूस करते हुए राष्ट्रपति ने स्नेहपूर्वक उन्हें अपनी 'छोटी बहन' कहकर संबोधित किया, लेकिन साथ ही उनकी अनुपस्थिति पर सवाल भी खड़े किए। इस प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा ने इसे राष्ट्रपति के पद और आदिवासी गौरव का अपमान करार देते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार जानबूझकर जनजातीय समुदायों से जुड़े आयोजनों को बाधित करने का प्रयास कर रही है।



दूसरी ओर, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए अपनी सरकार द्वारा अनुसूचित जनजातियों (ST) के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का हवाला दिया। टीएमसी नेतृत्व ने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि वह चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रही है। हालांकि, राष्ट्रपति जैसी सर्वोच्च संवैधानिक हस्ती द्वारा इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणी करना एक गंभीर संकेत है, जो आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में आदिवासी अस्मिता और केंद्र-राज्य संबंधों के बीच एक नया मोर्चा खोल सकता है।



विवाद के मुख्य बिंदु :


  • वेन्यू शिफ्टिंग: 5 लाख की क्षमता वाले विशाल मैदान के बजाय बागडोगरा एयरपोर्ट के पास छोटे और भीड़भाड़ वाले स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करना।
  • प्रोटोकॉल का अभाव: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या राज्य सरकार के किसी भी कैबिनेट मंत्री का समारोह में शामिल न होना।
  • जनजातीय असंतोष: आयोजन स्थल के छोटा होने के कारण हजारों आदिवासी प्रतिनिधियों का सम्मेलन में प्रवेश न मिल पाना।
  • राजनीतिक घमासान: भाजपा द्वारा इसे 'आदिवासी अपमान' बताना और टीएमसी द्वारा इसे 'चुनावी स्टंट' करार देना।
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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