पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक और सामाजिक-आर्थिक असंतोष चरम पर पहुंच गया है। व्यापारियों, वकीलों और नागरिक समाज समूहों के एक प्रमुख गठबंधन, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने अपनी अड़तीस सूत्रीय मांगों को लेकर पूरे क्षेत्र में एक बड़े लॉकडाउन और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस घोषणा के बाद से मुजफ्फरराबाद सहित पूरे संभाग में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण और संवेदनशील बनी हुई है। इससे पूर्व भी इस क्षेत्र में गंभीर नागरिक अशांति देखी गई थी, जब सुरक्षा बलों की कथित कार्रवाई में एक स्थानीय संगठन के नेता की मृत्यु हो गई थी। इस बार प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर व्यापक स्तर पर इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया है और आंदोलनकारी समूह की गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।

इस जन-आक्रोश का मुख्य कारण पिछले वर्ष अक्टूबर माह में हुआ मुजफ्फरराबाद समझौता है, जिसे पूरी तरह लागू न करने का आरोप इस्लामाबाद की संघीय सरकार पर लगाया जा रहा है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों और आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार द्वारा नियंत्रण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बारह शरणार्थी सीटों और क्षेत्रीय स्वायत्तता में कटौती करने वाले तेरहवें संवैधानिक संशोधन ने स्थानीय निवासियों के भीतर अविश्वास की भावना को और गहरा किया है। पाकिस्तानी मीडिया के आधिकारिक प्रोपेगैंडा और धरातल पर पीओके को दबाने वाली कड़वी सच्चाई के बीच का अंतर अब पूरी तरह उजागर हो चुका है। वर्तमान में इस संपूर्ण भूभाग के नागरिक भीषण बिजली कटौती, बेतहाशा महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, अपने ही प्राकृतिक संसाधनों के अनुचित दोहन और व्यवस्थागत राजनीतिक भेदभाव से बुरी तरह त्रस्त हैं।

सेंटर फॉर पीस स्टडीज की एक विशेष रिपोर्ट में अनुसंधानकर्ताओं ने रेखांकित किया है कि पीओके में स्थिति हर बीतते दिन के साथ अधिक गंभीर और अनियंत्रित होती जा रही है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी द्वारा घोषित इस बंद से पहले ही क्षेत्रीय सरकार पर कश्मीरी आवाम की उम्मीदों के साथ बार-बार धोखा करने और आर्थिक शोषण करने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। कमेटी की कोर काउंसिल ने चेतावनी जारी की है कि यदि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर त्वरित विचार नहीं किया गया, तो वे शटर-डाउन स्ट्राइक, चक्का जाम, लॉन्ग मार्च और अनिश्चितकालीन धरने जैसे कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे। यह आंदोलन मुख्य रूप से सुशासन की बहाली, बुनियादी मानवाधिकारों की रक्षा और सामाजिक-आर्थिक शिकायतों के निवारण पर केंद्रित है।

चिंताजनक बात यह है कि इस बड़े बंद के आधिकारिक क्रियान्वयन से पहले ही क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में हिंसक झड़पें और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जो आम जनता के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष और प्रशासनिक दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रावलकोट संभाग के खैगला बर्मा ब्रिज के समीप उस समय स्थिति अत्यंत नाजुक हो गई जब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर की गई सीधी फायरिंग में जेएएसी के कार्यकारी सदस्य शाहजैब हबीब की मृत्यु हो गई और कई अन्य स्थानीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद स्थानीय जनता का आक्रोश और अधिक भड़क उठा है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया के तौर पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने मुजफ्फरराबाद और आसपास के संवेदनशील जिलों में दूरसंचार और इंटरनेट सेवाओं को पूर्णतः निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, राजधानी और सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान फेडरल पुलिस और अर्द्धसैनिक बल 'पाकिस्तान रेंजर्स' की अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को भारी मात्रा में तैनात किया गया है। कानूनी मोर्चे पर कार्रवाई करते हुए प्रांतीय सरकार ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित करते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। आधिकारिक आदेश में समूह पर राज्य की शांति को भंग करने, समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करने और अशांति फैलाने का आरोप मढ़ा गया है।

दूसरी ओर, जेएएसी के नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से इस मानवीय संकट पर तुरंत ध्यान देने की भावुक अपील की है। कमेटी के वरिष्ठ सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने कहा कि महीनों से चल रहे एक शांतिपूर्ण सार्वजनिक आंदोलन का सामना सरकार द्वारा सैन्य दमन, नागरिकों की स्वतंत्रता पर पाबंदी और निर्दोष लोगों की हत्याओं के माध्यम से किया जा रहा है। गठबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक उनके अठारह सूत्रीय चार्टर जिसमें मुख्य रूप से आटे पर सब्सिडी की बहाली, गलत टैक्सों की वापसी, टोल प्लाजा का खात्मा और संसाधनों पर स्थानीय नियंत्रण शामिल हैं, को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या चुनावी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story