सुलग उठा PoK-अपनों पर गोलियां बरसाकर भारत पर दोष मढ़ने वाले इस्लामाबाद को दिल्ली ने ऐसे सिखाया सबक!
पीओके विधानसभा में शरणार्थी आरक्षण को लेकर भड़की हिंसा में 15 लोगों की मौत के बाद भारत ने इस्लामाबाद की प्रशासनिक विफलता और मानवाधिकार उल्लंघन को घेरा।

पीओके के रावलकोट और मुज़फ़्फ़राबाद में कश्मीरी शरणार्थी सीट आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन करते नागरिक (बाएं) और सुरक्षा व्यवस्था संभालते पाकिस्तानी पुलिसकर्मी (दाएं)।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में इस समय हालात बेहद गंभीर और तनावपूर्ण बने हुए हैं। विधानसभा में शरणार्थियों के लिए सीट आरक्षण के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ नागरिक विरोध प्रदर्शन अब एक व्यापक और हिंसक आंदोलन का रूप ले चुका है। इस अशांति के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक स्तर पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। पाकिस्तान द्वारा अपनी आंतरिक विफलताओं का ठीकरा भारत पर फोड़ने के प्रयासों को नई दिल्ली ने सिरे से खारिज करते हुए इस्लामाबाद को कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) है, जो साल 2023 से इस क्षेत्र में अधिकारों और नागरिक मुद्दों को लेकर एक प्रमुख आंदोलनकारी संगठन के रूप में सक्रिय रही है। ताजा विवाद की शुरुआत तब हुई जब पीओके प्रशासन ने पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में रह रहे जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए विधानसभा में 12 सीटें आरक्षित करने का फैसला किया। स्थानीय नागरिकों और जेएएसी ने इस फैसले को अपने लोकतांत्रिक और क्षेत्रीय अधिकारों पर आघात मानते हुए इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रावलकोट से शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन रविवार को सुरक्षाबलों के साथ हुई हिंसक झड़पों के बाद नियंत्रण से बाहर हो गया।
रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों द्वारा बल प्रयोग और कथित गोलीबारी की घटना के बाद हिंसा की यह आग तेजी से मुज़फ़्फ़राबाद और मीरपुर जैसे अन्य प्रमुख शहरों तक फैल गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने निहत्थे नागरिकों पर बेवजह गोलियां चलाईं, जिसमें अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इसके विपरीत, पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया और कानून व्यवस्था को हाथ में लिया, जिसके बाद मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी। इस हिंसा के विरोध में पूरे क्षेत्र में पूर्ण हड़ताल रही, जिससे बाजार, व्यापारिक प्रतिष्ठान और परिवहन सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत ने जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है और उसके शीर्ष नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। इसके साथ ही पूरे प्रभावित इलाके में इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है ताकि असंतोष की आवाज को दबाया जा सके। हालांकि, पीओके के कथित प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने बातचीत की पेशकश जरूर की है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों के मुख्य विवादित मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान सरकार ने इस आंदोलन के पीछे 'दुश्मन विदेशी ताकतों' का हाथ होने का पुराना और घिसा-पिटा आरोप भी दोहराया है।
पाकिस्तान के इन बेबुनियाद आरोपों पर भारत के विदेश मंत्रालय ने बेहद सख्त और करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि पाकिस्तान अपनी अंदरूनी नाकामियों और प्रशासनिक अक्षमता को छिपाने के लिए हमेशा की तरह भारत पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रहा है, जो पूरी तरह निराधार है। भारत ने पीओके में आम नागरिकों की बेरहमी से की जा रही हत्याओं और मानवाधिकारों के हनन की कड़े शब्दों में निंदा की है। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह पीओके की गंभीर स्थिति और वहां पाकिस्तान प्रशासन की गहरी संरचनात्मक समस्याओं पर ध्यान दे ताकि इस क्षेत्र में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए पाकिस्तान की जवाबदेही तय की जा सके।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
