PMMVY 2.0 : अब बेटियों के जन्म पर मिलेंगे ₹6,000; सीधे बैंक खाते में आएगी रकम!
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: गर्भवती महिलाओं को पहले बच्चे पर ₹5,000 और दूसरी बेटी होने पर ₹6,000 की आर्थिक सहायता। जानें पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और लाभ।

PMMVY 2.0
Pradhan Mantri Matru Vandana Yojana (PMMVY 2.0) : भारत में सुरक्षित मातृत्व और बेहतर पोषण सुनिश्चित करने की दिशा में केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' (PMMVY) एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित हो रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित यह योजना न केवल गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए एक सशक्त माध्यम बन गई है। 1 जनवरी 2017 से प्रभावी यह पहल अब 'मिशन शक्ति' के नए दिशानिर्देशों (PMMVY 2.0) के साथ और भी अधिक समावेशी और प्रभावशाली हो गई है, जिसका सीधा लाभ देश के वंचित वर्गों की लाखों माताओं को मिल रहा है।
आर्थिक सुरक्षा और पोषण का अनूठा संगम :
इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य प्रसव से पहले और बाद में महिलाओं को आराम करने के लिए प्रोत्साहित करना और उस अवधि के दौरान होने वाली वेतन हानि की आंशिक भरपाई करना है। योजना की संरचना इस प्रकार की गई है कि यह न केवल नकद सहायता देती है, बल्कि समय पर स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण को भी सुनिश्चित करती है। पहले बच्चे के जन्म पर सरकार दो किस्तों के माध्यम से कुल ₹5,000 की सहायता प्रदान करती है। इसमें ₹3,000 की पहली किस्त गर्भावस्था पंजीकरण और कम से कम एक प्रसव पूर्व जांच (ANC) के बाद दी जाती है, जबकि ₹2,000 की दूसरी किस्त बच्चे के जन्म पंजीकरण और 14 सप्ताह तक के अनिवार्य टीकाकरण के पश्चात हस्तांतरित की जाती है। जननी सुरक्षा योजना (JSY) के लाभों को मिलाकर एक महिला को औसतन ₹6,000 तक की कुल सहायता प्राप्त होती है।
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ: PMMVY 2.0 का नया आयाम
योजना का सबसे प्रशंसनीय पहलू इसका 'बालिका केंद्रित' दृष्टिकोण है। लिंगानुपात में सुधार लाने और कन्या भ्रूण हत्या जैसे अभिशाप को खत्म करने के लिए, सरकार ने दूसरे बच्चे के रूप में बेटी होने पर ₹6,000 की एकमुश्त सहायता का प्रावधान किया है। यह कदम समाज में बेटियों के जन्म को एक उत्सव और गर्व के अवसर के रूप में स्थापित करने का प्रयास है। यदि किसी महिला को जुड़वां या तिहरे बच्चे होते हैं और उनमें से एक या अधिक लड़कियां हैं, तो भी वह इस अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि की पात्र मानी जाएगी।
पात्रता मानदंड और समावेशी पहुंच :
योजना का लाभ समाज के उन वर्गों तक पहुँचाने का लक्ष्य है जो आर्थिक रूप से असुरक्षित हैं। इसके अंतर्गत पात्रता के कुछ प्रमुख मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
- आयु : आवेदक महिला की आयु कम से कम 19 वर्ष होनी चाहिए।
- आय सीमा : जिन परिवारों की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है, वे इसके पात्र हैं।
- विशेष श्रेणियां : अनुसूचित जाति/जनजाति, दिव्यांग महिलाएं, बीपीएल कार्ड धारक, ई-श्रम और मनरेगा जॉब कार्ड धारक महिलाएं।
- स्वास्थ्य कार्यकर्ता : आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW), सहायिका (AWH) और आशा कार्यकर्ता भी इस लाभ के लिए पात्र हैं।
- अपवाद : केंद्र या राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) में नियमित रोजगार वाली महिलाएं इस योजना के दायरे से बाहर रखी गई हैं।
पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज :
भ्रष्टाचार मुक्त और त्वरित लाभ वितरण के लिए योजना को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। इच्छुक महिलाएं आधिकारिक मंत्रालय की वेबसाइट पर 'सिटीजन लॉगिन' के माध्यम से या मोबाइल ऐप के जरिए स्वयं पंजीकरण कर सकती हैं। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, एमसीपी/आरसीएचआई कार्ड और टीकाकरण विवरण जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं। भुगतान सीधे लाभार्थी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते (DBT) में किया जाता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
