तकनीक बने वरदान, न कि बच्चों के लिए खतरा, G7 मंच से पीएम मोदी ने AI के खतरों पर उठाई आवाज।
पीएम मोदी ने G7 में एआई के गलत इस्तेमाल और डीपफेक पर चिंता जताई, कहा- सुरक्षा उपायों के बिना बच्चों के लिए बन सकता है बड़ा खतरा।

फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जहाँ उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित उपयोग पर जोर दिया।
फ्रांस के एवियॉन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक समुदाय को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई (AI) के अनियंत्रित और असुरक्षित उपयोग के प्रति गंभीर आगाह किया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह तकनीक मानवीय क्षमताओं के विस्तार में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकती है, लेकिन उचित सुरक्षा उपायों के अभाव में यह बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। उन्होंने वैश्विक नेताओं का ध्यान इस बात पर आकर्षित किया कि डिजिटल दुनिया बच्चों के लिए सीखने का एक प्रभावी माध्यम होनी चाहिए, न कि उन्हें गुमराह करने या उनके शोषण का जरिया।
जी7 शिखर सम्मेलन के ‘सुरक्षित, त्वरित और प्रभावी एआई कार्यान्वयन सुनिश्चित करना’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने डीपफेक, भ्रामक जानकारी और साइबर धोखाधड़ी को आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि एआई की वास्तविक परीक्षा यह नहीं है कि हमारी मशीनें कितनी शक्तिशाली हैं, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करती है कि आम नागरिक को उससे कितनी ताकत और अवसर मिल रहे हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि एआई के माध्यम से बच्चों को उनकी अपनी भाषाओं में शिक्षित किया जा सकता है और उनके सीखने के अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाया जा सकता है, परंतु यदि इसे सुरक्षा के व्यापक ढांचे के बिना लागू किया गया, तो यही तकनीक उन्हें गलत जानकारी और शोषण के जाल में धकेल सकती है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि एआई को लेकर हमारी सोच और नीतियां स्पष्ट होनी चाहिए। उनके अनुसार, तकनीक के दोहरे उपयोग और इसके प्रभावों के बीच का अंतर मशीन का नहीं, बल्कि मानव मूल्यों, डिजाइन और बेहतर शासन का है। उन्होंने कहा कि एआई का मूल उद्देश्य मानवीय गरिमा की रक्षा करना और लोगों को अधिकार संपन्न बनाना होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने भारत में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ का उल्लेख करते हुए ‘मानव-केंद्रित एआई’ के दृष्टिकोण को अपनाने का आह्वान किया।
साइबर सुरक्षा को एक सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक विश्व के सभी देश सुरक्षित नहीं हैं, तब तक कोई भी राष्ट्र साइबर क्षेत्र में पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह सकता। इसीलिए, भारत ने हमेशा साइबर क्षेत्र को ‘ग्लोबल पब्लिक गुड’ यानी वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखा है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक समुदाय से डीपफेक और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ एक मजबूत और समन्वित वैश्विक सहयोग बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करना आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है ताकि भविष्य की पीढ़ियों को एक सुरक्षित और रचनात्मक वातावरण मिल सके। यह संबोधन एआई के विकास और इसके नियमन के प्रति भारत के दृढ़ और उत्तरदायी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है, जिसमें तकनीक का लाभ उठाने के साथ-साथ मानवीय मूल्यों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
