PM Modi on Women Reservation Bill 2026 : भारतीय लोकतंत्र के मंदिर में आज एक ऐसी गूँज सुनाई दी, जिसने भविष्य के भारत की 'नारी शक्ति' के लिए नई राहें खोल दी हैं। संसद के विशेष सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को लागू करने के लिए लाए गए तीन संशोधन विधेयकों पर चर्चा करते हुए न केवल विपक्षी दलों को आइना दिखाया, बल्कि राजनीति से ऊपर उठकर एक भावुक और निर्णायक प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें इस ऐतिहासिक कदम का कोई श्रेय नहीं चाहिए। प्रधानमंत्री ने विपक्ष को संबोधित करते हुए यहाँ तक कह दिया, "मैं आपको क्रेडिट का ब्लैंक चेक दे रहा हूँ, बस मिलकर महिलाओं को उनका अधिकार दिलाएँ।" उनका यह बयान सदन के भीतर उस समय आया जब महिला आरक्षण और परिसीमन के तकनीकी पहलुओं पर तीखी बहस जारी थी।

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किए गए इन विधेयकों का उद्देश्य 2023 में पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को मूर्त रूप देना है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले तीन दशकों के राजनीतिक संघर्ष और विरोधों का जिक्र करते हुए कहा कि 21वीं सदी का भारत अब पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की 50 प्रतिशत आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी मांग है। प्रधानमंत्री ने उन राजनीतिक दलों को भी चेताया जो इस बिल के विरोध की राह देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि महिलाओं के हक का विरोध करने वालों को देश की नारी शक्ति ने कभी माफ नहीं किया है।

संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री का रुख उस समय अधिक आक्रामक और सीधा हो गया जब उन्होंने 'क्रेडिट की राजनीति' पर प्रहार किया। उन्होंने विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यदि उन्हें राजनीतिक स्वार्थ की चिंता होती, तो वे इसे लागू करने में और देरी कर सकते थे, लेकिन 2029 का अवसर देश के लिए मील का पत्थर साबित होना चाहिए। उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे इस विषय को राजनीतिक रंग देने के बजाय राष्ट्र निर्माण के चश्मे से देखें। पीएम मोदी ने कहा कि बिल पारित होते ही वे खुद विज्ञापन देकर सभी दलों को धन्यवाद देने और उनकी फोटो छपवाने के लिए तैयार हैं, बशर्ते यह साझा उपलब्धि के रूप में मनाया जाए।

विधेयकों के कानूनी पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने समझाया कि ये संशोधन केवल सीटों के आरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये संविधान के माध्यम से महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने का प्रयास हैं। उन्होंने उन महिला नेताओं की बढ़ती ताकत का भी उल्लेख किया जो पिछले 25-30 वर्षों में जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं और अब संसद में अपनी जगह माँग रही हैं। इस ऐतिहासिक बहस का समापन करते हुए प्रधानमंत्री ने दोहराया कि विकसित भारत के नीति निर्धारण में 'सबका साथ, सबका विकास' तभी सार्थक होगा जब भारत की माताएं और बहनें नीति निर्धारण की मुख्यधारा में होंगी। यह सत्र न केवल एक विधेयक की सफलता का गवाह बना, बल्कि इसने भारतीय राजनीति में 'क्रेडिट' की होड़ से परे जाकर देशहित को सर्वोपरि रखने की एक नई मिसाल पेश की है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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