मन की बात में छाए बस्ती के आकाश गुप्ता, मनोरमा नदी का कायाकल्प कर बटोरी पीएम मोदी से तारीफ|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्ती जिले के लानघटा गांव के युवाओं द्वारा पौराणिक नदी का कायाकल्प करने के संकल्प को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया।

बस्ती जिले के लानघटा गांव में अपनी टीम के साथ मनोरमा नदी की सफाई के बाद जल में खड़े आकाश गुप्ता और उनके साथी युवा।
बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के एक छोटे से गांव से निकली हौसले की कहानी ने आज पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में बस्ती जिले के लानघटा गांव के रहने वाले युवा आकाश गुप्ता और उनके साथियों के प्रयासों की जमकर सराहना की है। वर्षों से उपेक्षित और गंदगी के दलदल में तब्दील हो चुकी ऐतिहासिक मनोरमा नदी को पुनर्जीवित करने के संकल्प ने इस ग्रामीण युवा को राष्ट्रीय फलक पर लाकर खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री ने आकाश के इस जज्बे को देश के लिए एक बड़ी प्रेरणा बताया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया कि आकाश गुप्ता ने बदहाल व्यवस्था को लेकर केवल शिकायतें दर्ज कराने के बजाय खुद धरातल पर उतरकर बदलाव की शुरुआत की। उन्होंने अपने सीमित संसाधनों के साथ इस कठिन यात्रा का आगाज किया। प्रधानमंत्री के शब्दों में, आकाश के पास शुरुआत में कोई बड़ी मशीनरी नहीं थी, बल्कि उनके पास केवल एक साधारण जाल, फावड़ा, टोकरी और सबसे बड़ी ताकत के रूप में कुछ बदलने का अटूट संकल्प था। इसी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर यह युवा अपने दोस्तों के साथ मिलकर हर दिन नदी के भीतर उतरता था।
इस स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत बेहद चुनौतीपूर्ण रही है। आकाश गुप्ता और उनकी मित्र मंडली रोजाना नदी के पानी में उतरकर जहरीली जलकुंभी, फेंके गए प्लास्टिक और भारी मात्रा में कचरे को बाहर निकालते थे। यह अभियान कितना व्यापक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह टीम एक-एक दिन में नदी से करीब पचास से साठ किलोग्राम तक कचरा बाहर निकाल देती थी। लगातार महीनों तक की गई इस अथक मेहनत का परिणाम यह हुआ कि मनोरमा नदी का वह प्रभावित हिस्सा एक बार फिर से अपनी पुरानी पहचान वापस पाने लगा और पानी पूरी तरह से साफ दिखने लगा।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो आकाश गुप्ता केवल बारहवीं कक्षा तक पढ़े हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनकी समझ किसी बड़े विशेषज्ञ से कम नहीं है। आकाश ने बताया कि मनोरमा नदी का उल्लेख प्राचीन पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है, परंतु लंबे समय से प्रशासनिक और सामाजिक उपेक्षा के कारण इसकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी। वे अक्सर अपने साथियों के साथ नदी के किनारे समय बिताने जाते थे, लेकिन वहां से उठने वाली तीव्र दुर्गंध के कारण बैठना मुश्किल हो जाता था। इसी पीड़ा ने उन्हें इस ऐतिहासिक धरोहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए प्रेरित किया।
इस साहसिक कार्य के दौरान आकाश और उनके साथियों को कई शारीरिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ा। सफाई के दौरान नदी की तलहटी में छिपे कांच के नुकीले टुकड़ों से वे कई बार चोटिल और लहूलुहान हुए, लेकिन इस बाधा ने उनके कदमों को पीछे नहीं धकेला। निरंतर प्रयासों का ही असर है कि आज इस घाट पर न सिर्फ मवेशी आकर पानी पीते हैं, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों ने भी यहां आकर स्नान करना शुरू कर दिया है। आकाश का मानना है कि यदि इसी प्रकार का जनभागीदारी अभियान नदी के किनारे बसे अन्य गांवों में भी शुरू हो जाए, तो आदि गंगा मनोरमा को पुनः पूरी तरह से निर्मल और अविरल बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने इस प्रेरक प्रसंग को देश के सामने रखते हुए कहा कि भारत के हर गांव और शहर में कुछ न कुछ ऐसा सकारात्मक घटित हो रहा है जो समाज को एक नई दिशा और प्रेरणा देता है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने आस-पास ऐसे जनहित अभियानों से सक्रिय रूप से जुड़ें। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने, धूप में निकलते समय एहतियात बरतने और प्रचुर मात्रा में पानी पीने की सलाह दी। इसी संबोधन में उन्होंने वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध लंगड़ा आम की अनूठी विशेषता का भी उल्लेख किया, जो पकने के बाद भी हरा रहता है, और इसकी खेती से जुड़े प्रगतिशील किसानों की सराहना की।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
