ओस्लो: पश्चिमी एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति में पैदा हुए व्यवधानों के बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 18 मई, 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो पहुंचे हैं। पिछले 43 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली नॉर्वे यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी यहां आयोजित हो रहे तीसरे भारत-नॉर्डिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जिसमें उत्तरी यूरोप और आर्कटिक क्षेत्र के पांच प्रमुख नॉर्डिक देशों—डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन—के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। यह राजनयिक दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी अमेरिका-ईरान तनाव के कारण खाड़ी देशों से होने वाली अपनी ऊर्जा आपूर्ति में कटौती का सामना कर रहा है।

उत्तरी यूरोप के एक संवैधानिक राजतंत्र नॉर्वे का इतिहास करीब एक हजार वर्ष पुराना है। वर्ष 1905 में स्वीडन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद नॉर्वे एक सामान्य यूरोपीय राष्ट्र बना रहा, लेकिन 1970 के दशक में उत्तरी सागर (North Sea) में अपतटीय तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडारों की खोज ने इस देश की अर्थव्यवस्था की दिशा और दशा पूरी तरह बदल दी। आज नॉर्वे दुनिया के सबसे बड़े पेट्रोलियम निर्यातक देशों में शुमार है। इस प्राकृतिक संपदा से प्राप्त राजस्व का उपयोग नॉर्वे ने एक अत्यंत सुदृढ़ समाज कल्याणकारी व्यवस्था के निर्माण में किया है। वर्तमान में नॉर्वे मानव विकास सूचकांक और विश्व खुशहाली सूचकांक में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है, जहां प्रति व्यक्ति वार्षिक घरेलू आय लगभग 47,000 डॉलर है और बेरोजगारी दर महज 3.97% बनी हुई है। करीब 56.6 लाख की आबादी वाले इस देश में वर्तमान में 25 हजार से अधिक भारतीय मूल के लोग निवास कर रहे हैं।

आधिकारिक घोषणा के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर ओस्लो में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। दोनों नेता भारत-नॉर्वे व्यापार एवं अनुसंधान शिखर सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के बीच हस्ताक्षरित व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) को प्रभावी ढंग से लागू करना है। 10 मार्च, 2024 को हस्ताक्षरित यह ऐतिहासिक व्यापार समझौता 1 अक्टूबर, 2025 से पूरी तरह लागू हो चुका है। यह समझौता भारत को आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे चार प्रमुख यूरोपीय देशों के बाजार से जोड़ता है।

राजनयिक और आर्थिक मोर्चे पर इस यात्रा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत-ईएफटीए-टीईपीए समझौते के तहत ईएफटीए देश आगामी 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने और लगभग 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कानूनी रूप से प्रतिबद्ध हैं। नॉर्वे में भारत की राजदूत ग्लोरिया गैंगटे ने इस यात्रा के संदर्भ में स्पष्ट किया कि वैश्विक उथल-पुथल के इस वर्तमान माहौल में भारत-नॉर्वे संबंधों ने एक नया आयाम ले लिया है। भारत में कार्यरत अनेक नॉर्वेजियन कंपनियां इस नए व्यापार समझौते के माध्यम से निवेश के नए अवसरों का लाभ उठाने के लिए तत्पर हैं।

इस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अलावा स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकी, ब्लू इकॉनमी, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज, अपतटीय पवन ऊर्जा, बैटरी प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा दक्षता जैसे अत्याधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक व्यापक और दीर्घकालिक रणनीतिक एजेंडे को अंतिम रूप दिया जाएगा। भारत की वर्तमान ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकताओं और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को देखते हुए नॉर्वे के साथ यह तकनीकी और व्यापारिक साझेदारी भविष्य के लिए अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है।



Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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