वैश्विक दोस्ती का नया अध्याय- पांच देशों के मेगा मिशन पर निकले पीएम मोदी, बदल जाएगी दुनिया में देश की तस्वीर|
प्रधानमंत्री मोदी यूएई में ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे और नॉर्वे में भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच राष्ट्रों की आधिकारिक यात्रा के लिए नई दिल्ली से विमान में सवार होते हुए हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं।
नई दिल्ली: भारत की 'विश्व-मित्र' की छवि को और अधिक प्रभावी बनाने और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अत्यंत महत्वपूर्ण पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। इस रणनीतिक दौरे के दौरान प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली जैसे प्रभावशाली देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ गहन संवाद करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मिशन की पुष्टि करते हुए बताया कि आगामी छह दिनों के भीतर प्रधानमंत्री कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय वार्ताएं करेंगे, जिसका प्राथमिक उद्देश्य भारत की वैश्विक उपस्थिति को सशक्त करना और रणनीतिक निवेश को आकर्षित करना है।
प्रधानमंत्री की इस यात्रा का प्रथम पड़ाव रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संयुक्त अरब अमीरात (UAE) है। अबू धाबी आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य दोनों राष्ट्रों के मध्य विद्यमान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ बनाना है। वह यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान के साथ ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश और जन-जन के बीच संपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे। विशेष रूप से, इस यात्रा के दौरान एलपीजी और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व के क्षेत्र में दो अत्यंत महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर होने की प्रबल संभावना है। यूएई पिछले ढाई दशकों से भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा है और वहां निवास करने वाले 4.5 मिलियन से अधिक भारतीयों का कल्याण भी प्रधानमंत्री की प्राथमिकता सूची में शामिल है।
यूएई के बाद प्रधानमंत्री का अगला गंतव्य नीदरलैंड्स होगा। वर्ष 2017 के बाद प्रधानमंत्री की यह दूसरी आधिकारिक नीदरलैंड्स यात्रा है, जहां वह किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से शिष्टाचार भेंट करेंगे। इसके उपरांत, प्रधानमंत्री रॉब जेटन के साथ द्विपक्षीय हितों के मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खुलने की उम्मीद है। नीदरलैंड्स भारत के लिए यूरोप में एक प्रमुख आर्थिक द्वार की भूमिका निभाता रहा है, ऐसे में यह दौरा आर्थिक संबंधों को और अधिक सुसंगत बनाएगा।
यात्रा के तृतीय चरण में प्रधानमंत्री स्वीडन के गोथेनबर्ग पहुंचेंगे। यहां वह अपने स्वीडिश समकक्ष उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी आयामों की समीक्षा करेंगे। स्वीडन में प्रधानमंत्री मोदी और उनके समकक्ष यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ 'यूरोपीय राउंड टेबल फॉर इंडस्ट्री' को भी संबोधित करेंगे, जो पैन-यूरोपियन बिजनेस लीडर्स का एक विशाल मंच है। इसके पश्चात, प्रधानमंत्री नॉर्वे के लिए प्रस्थान करेंगे जहां वह तीसरे 'भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन' में शिरकत करेंगे। यह शिखर सम्मेलन नॉर्डिक देशों के साथ भारत के नवाचार, हरित ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।
दौरे के अंतिम पड़ाव में प्रधानमंत्री इटली पहुंचेंगे, जहां वह राष्ट्रपति सर्जियो मटेरेला और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ विस्तृत वार्ता करेंगे। जी-7 और जी-20 जैसे मंचों पर भारत और इटली के बढ़ते समन्वय के बीच यह मुलाकात रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को नई गति देगी। यह छह दिवसीय यात्रा न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने का एक माध्यम है, बल्कि यह उभरती हुई वैश्विक व्यवस्था में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को भी रेखांकित करती है। इस महादौरे से प्राप्त होने वाले परिणाम आने वाले वर्षों में भारत की वैदेशिक नीति और आर्थिक विकास की दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होंगे।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
