युद्ध के साये में बड़ी बैठक! पांच देशों से लौटते ही पीएम मोदी ने क्यों बुलाई कैबिनेट, जानें देश के लिए क्या है नया प्लान!
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच देश को आर्थिक संकट से बचाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री ने मंत्रियों के साथ किया बड़ा मंथन।

नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में उपस्थित वरिष्ठ मंत्रीगण।
वैश्विक राजनीतिक उथल-पुथल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते आर्थिक संकट के बीच देश की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पांच देशों के अपने व्यस्त राजनयिक दौरे से स्वदेश लौटते ही प्रधानमंत्री ने बिना समय गंवाए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। 'सेवा तीर्थ' में आयोजित इस मैराथन बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री और स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री शामिल हुए। चालू वर्ष की इस पहली पूर्ण मंत्रिपरिषद बैठक में जहां एक ओर देश को आंतरिक रूप से मजबूत बनाने के सुधारों पर विचार किया गया, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर उपजे गंभीर भू-राजनीतिक संकटों से भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के उपायों पर गहन चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के अगले दिन इस महत्वपूर्ण रणनीतिक विमर्श के प्रमुख बिंदुओं को देश के सामने साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिपरिषद की यह बैठक बेहद सार्थक रही, जिसमें देश के भीतर आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाने यानी 'ईज ऑफ लिविंग' और उद्योग-व्यापार जगत को गति देने के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान हुआ ताकि आने वाले समय में 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को समयबद्ध तरीके से साकार किया जा सके। सरकार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने के लिए बड़े सुधारों की रूपरेखा तैयार कर रही है।
हालांकि, इस बैठक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां रहीं। यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई है जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध ने पूरी दुनिया के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है। बैठक के दौरान इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई कि ईंधन की आपूर्ति में आने वाली रुकावटों और बढ़ती कीमतों का सीधा असर देश की घरेलू महंगाई दर पर पड़ सकता है। सरकार इस पूरे घटनाक्रम और इसके आर्थिक प्रभावों पर लगातार पैनी नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू बाजार को किसी भी बड़े झटके से बचाया जा सके।
इस अप्रत्याशित वैश्विक संकट से निपटने और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सरकार ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। बैठक के बाद यह बात सामने आई है कि प्रधानमंत्री ने देशवासियों से ईंधन का बेहद समझदारी और किफायत से इस्तेमाल करने का आग्रह किया है। इसके लिए सरकार आने वाले समय में 'वर्क फ्रॉम होम' यानी घर से काम करने की संस्कृति को फिर से बढ़ावा दे सकती है ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव और ईंधन की खपत को कम किया जा सके। इसके साथ ही प्रशासनिक और व्यावसायिक स्तर पर आमने-सामने की बैठकों के स्थान पर ऑनलाइन बैठकों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
आर्थिक मोर्चे पर देश के विदेशी मुद्रा भंडार और राजकोषीय स्थिति को मजबूत रखने के लिए नागरिकों से कुछ कड़े और व्यावहारिक कदम उठाने की अपेक्षा की गई है। इसके तहत देशवासियों को कम से कम एक साल तक भारी मात्रा में सोना खरीदने से बचने की सलाह दी गई है, क्योंकि सोने के अत्यधिक आयात से देश का विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित होता है। इसके साथ ही अनावश्यक विदेशी यात्राओं से परहेज करने का भी सुझाव दिया गया है ताकि देश का धन घरेलू अर्थव्यवस्था में ही बना रहे। सरकार के इन नीतिगत और व्यावहारिक दिशा-निर्देशों से स्पष्ट है कि भारत वर्तमान वैश्विक संकट को भांपते हुए समय से पहले अपनी सुरक्षात्मक तैयारी पूरी कर रहा है ताकि देश की विकास दर प्रभावित न हो।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
