नई दिल्ली। देश की आर्थिक उन्नति और बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में कई युगांतकारी नीतिगत निर्णयों पर मुहर लगाई गई है। इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के विमानन क्षेत्र, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को गति देने के लिए कुल ३९,२९० करोड़ रुपये की विशाल वित्तीय योजनाओं को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई है। सरकार के इन दूरगामी फैसलों का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी अस्थिरता के बीच घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना, दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के पर्यावरण में सुधार करना और तटीय राज्यों में सड़क संपर्क को अभूतपूर्व विस्तार देना है।

इस कैबिनेट बैठक का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) को प्रदान की जाने वाली १०,००० करोड़ रुपये की एकमुश्त बजटीय सहायता है। इस वित्तीय पैकेज का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट और तनाव के कारण कच्चे तेल तथा विमानन ईंधन (एटीएफ) की वैश्विक कीमतों में आ रहे भारी उतार-चढ़ाव से भारतीय विमानन बाजार को सुरक्षित रखना है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की आधिकारिक ब्रीफिंग के दौरान जानकारी दी कि यह विशेष वित्तीय सहायता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की 'डिमांड्स फॉर ग्रांट्स' के माध्यम से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को ब्याज-मुक्त एडवांस के रूप में आवंटित की जाएगी। इस बजटीय सहयोग के फलस्वरूप अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को उनके घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन्स के लिए एटीएफ की स्थिर कीमतें उपलब्ध हो सकेंगी, जिससे अंततः हवाई यात्रियों पर किराए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ गतिशीलता (क्लीनर मोबिलिटी) के मोर्चे पर भी कैबिनेट ने दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक दो-वर्षीय योजना को हरी झंडी दिखाई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर को नियंत्रित करने के लिए पुराने व्यावसायिक ट्रकों और बसों को बदलने की एक विस्तृत नीति तैयार की गई है, जिस पर कुल ५,०४१ करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय किया जाएगा। इस बड़े पर्यावरणीय प्रोजेक्ट का वित्तपोषण आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन संचालित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा। इस बड़े प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की संयुक्त जिम्मेदारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की होगी, जिसे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे सहभागी राज्यों के साथ मिलकर कड़ाई से लागू किया जाएगा ताकि रिहायशी इलाकों में कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके।

इसके अतिरिक्त, देश के तटीय व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने के लिए कैबिनेट समिति ने ओडिशा में एक नए वृहद कोस्टल हाईवे के निर्माण को अपनी प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। ओडिशा के रामेश्वर से लेकर पारादीप बंदरगाह तक बनने वाले इस नए तटीय राजमार्ग की कुल लंबाई १६०.१८ किलोमीटर निर्धारित की गई है। इस विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना की कुल पूंजीगत लागत ८,३००.७९ करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसे 'हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल' (एचएएम) के तहत दो अलग-अलग पैकेजों में विकसित किया जाएगा। यह राजमार्ग न केवल पारादीप पोर्ट तक माल ढुलाई को सुगम बनाएगा, बल्कि तटीय जिलों में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के नए अवसरों का सृजन भी करेगा।

इन सभी स्वीकृत परियोजनाओं को वैधानिक और प्रशासनिक रूप से पारदर्शी तरीके से समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए संबंधित मंत्रालयों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का यह कदम देश के आर्थिक तंत्र को बाहरी वैश्विक झटकों से बचाने के साथ-साथ आंतरिक बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ठोस और निर्णायक प्रयास है, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव आने वाले समय में देश के औद्योगिक विकास और आम नागरिक के जीवन स्तर पर दिखाई देगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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