Pariksha Pe Charcha 2026 : बोर्ड परीक्षाओं की दहलीज पर खड़े देश के लाखों छात्रों के चेहरों पर आज एक अलग ही मुस्कान और आत्मविश्वास देखने को मिला। अवसर था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संवाद कार्यक्रम 'परीक्षा पे चर्चा' का। इस वर्ष का आयोजन केवल एक संवाद मात्र नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन के रूप में उभरा है, जिसने देश के कोने-कोने को एक सूत्र में पिरो दिया। 'माईगव इंडिया' द्वारा जारी किए गए आंकड़ों और विजुअल्स ने इस बात की तस्दीक की है कि कैसे एक प्रधानमंत्री और छात्रों के बीच का यह रिश्ता अब एक अटूट परंपरा बन चुका है।

कन्याकुमारी से गुवाहाटी तक गूंजी 'मन की बात' :

इस वर्ष का आयोजन भौगोलिक सीमाओं को लांघते हुए भारत की विविधता का प्रतीक बना। प्रधानमंत्री ने केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि कोयंबटूर (तमिलनाडु), रायपुर (छत्तीसगढ़), देव मोगरा (गुजरात) और गुवाहाटी (असम) के छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। यह पहल देश के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण और मध्य भारत की आवाजों को एक साझा मंच पर लाने का सफल प्रयास रही।

सहभागिता का टूटा रिकॉर्ड: 6.76 करोड़ का आंकड़ा

'माईगव इंडिया' के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस संस्करण ने लोकप्रियता के पिछले सभी कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं:

कुल सहभागिता: 6.76 करोड़ से अधिक लोग।

पंजीकरण: 4.5 करोड़ से अधिक प्रतिभागियों ने आधिकारिक रूप से अपना नामांकन कराया।

सक्रिय भागीदारी: 2.26 करोड़ लोगों ने परीक्षा से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया।

हंसी-मजाक के बीच सफलता के 'गुरुमंत्र' :

लगभग दो मिनट के हृदयस्पर्शी वीडियो में पीएम मोदी को छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत करते और गंभीर सवालों के समाधान देते देखा गया। संवाद के मुख्य अंश निम्नलिखित रहे:

लिखने की आदत: पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि परीक्षा के तनाव से बचने का सबसे प्रभावी तरीका 'लिखने की आदत' है।

स्टोरेज और क्षमता: उन्होंने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, "यह मानकर चलिए कि आपने जो पढ़ा है, वह कहीं न कहीं मस्तिष्क में स्टोर है। हर इंसान को सब कुछ नहीं आता, लेकिन यह निश्चित है कि हर व्यक्ति को कुछ न कुछ जरूर आता है।"

प्रेरणा और संगीत: बातचीत के दौरान एक छात्रा ने पीएम के लिए प्रेरक गीत गाया, तो कोई छात्र अपनी कलाकृतियां लेकर पहुंचा। किसी ने चाय के साथ पीएम का स्वागत किया, जिससे माहौल किसी औपचारिक सभा के बजाय एक पारिवारिक मिलन जैसा नजर आया।

सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक सेतु :

'परीक्षा पे चर्चा' केवल प्रश्न-उत्तर का सत्र नहीं है। यह एक ऐसा अभियान है जो प्रधानमंत्री के उस विजन को दर्शाता है जहां शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से अभिभावकों और शिक्षकों को भी यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक बच्चे का व्यक्तित्व अनोखा है और उसे अपनी अभिव्यक्ति का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इस संवाद के अंत में छात्र केवल अपने सवालों के जवाब लेकर नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक अटूट भरोसा और आत्मविश्वास लेकर लौटे हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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