PM Modi Gujarat visit 2026 : अरब सागर के तट पर स्थित भगवान शिव के पावन ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर की आध्यात्मिक शांति के बीच सोमवार को एक ऐसा कड़ा और शक्तिशाली कूटनीतिक संदेश गूंजा, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे के तहत गिर सोमनाथ पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अटूट सांस्कृतिक विरासत और बढ़ती वैश्विक ताकत का जयघोष करते हुए स्पष्ट किया कि आज के नए भारत को दुनिया की कोई भी ताकत न तो झुका सकती है और न ही किसी दबाव में ला सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भव्यता और अगाध आस्था का एक अनूठा संगम रहा। सोमवार सुबह गिर सोमनाथ पहुंचने पर एक विशाल रोड शो के जरिए उनका अभूतपूर्व स्वागत किया गया, जहां सड़कों के दोनों ओर खड़ी अपार भीड़ ने पूरे उत्साह के साथ अपने नेता का अभिवादन किया। इसके पश्चात, प्रधानमंत्री ने सीधे सोमनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया और पूरी वैदिक रीति से कुंभाभिषेक तथा विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के इस ऐतिहासिक अवसर पर जब प्रधानमंत्री ने विशाल जनसभा को संबोधित करना शुरू किया, तो उनके ओजस्वी शब्दों में राष्ट्रवाद, अखंडता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की स्पष्ट झलक देखने को मिली।

अपने संबोधन के दौरान 11 मई के ऐतिहासिक दिन और 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने भारत के अदम्य साहस को याद किया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि पोखरण परीक्षण के बाद पूरी दुनिया की आंखें लाल हो गई थीं और वैश्विक महाशक्तियों ने भारत के खिलाफ एकजुट होकर तमाम कड़े आर्थिक और सामरिक प्रतिबंध थोप दिए थे, लेकिन भारत अपने मजबूत इरादों से एक इंच भी पीछे नहीं हटा। प्रधानमंत्री का यह बयान स्पष्ट करता है कि दबाव के आगे न झुकने की जो कूटनीतिक नींव पोखरण में रखी गई थी, वही अटल इच्छाशक्ति आज भी भारत की वैश्विक विदेश नीति का मुख्य आधार बनी हुई है।

इतिहास के पन्नों को पलटते हुए पीएम मोदी ने विदेशी आक्रांताओं के क्रूर मंसूबों पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों ने सोमनाथ मंदिर को सिर्फ एक भौतिक ढांचा समझकर बार-बार इसके वैभव को मिटाने और इसे तोड़ने की साजिशें रचीं। लेकिन, हर भीषण विध्वंस के बाद सोमनाथ पहले से कहीं अधिक भव्यता के साथ उठ खड़ा हुआ, क्योंकि आक्रमणकारी भारत की उस अजेय वैचारिक और सनातन शक्ति को कभी समझ ही नहीं पाए जो शरीर को नश्वर और आत्मा को अविनाशी मानती है। इसी संदर्भ में उन्होंने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को नमन किया, जिन्होंने न केवल 500 से अधिक रियासतों का एकीकरण कर आधुनिक भारत की मजबूत नींव रखी, बल्कि सोमनाथ मंदिर के गौरवशाली पुनर्निर्माण का संकल्प भी सिद्ध किया।

सोमनाथ धाम से अपना विशेष और आत्मीय जुड़ाव साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शिव सर्वात्मा हैं और यही शाश्वत चेतना भारत की सबसे बड़ी ताकत है। कड़ी त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुए इस भव्य कार्यक्रम के बाद, प्रधानमंत्री आज शाम वडोदरा में नवनिर्मित सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन करेंगे और एक अन्य विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। सोमनाथ की भूमि से दिया गया प्रधानमंत्री का यह संदेश महज एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की उस नई और आक्रामक कूटनीति का स्पष्ट उद्घोष है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर दुनिया की आंखों में आंखें डालकर बात करने का माद्दा रखती है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story