नई दिल्ली: वैश्विक राजनीति के मंच पर ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच गहराते युद्ध के बादलों ने भारतीय अर्थव्यवस्था और आम नागरिक की जेब पर सीधा प्रहार करना शुरू कर दिया है। सरकारी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई भारी तेजी और वित्तीय घाटे को संतुलित करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3.29 रुपये प्रति लीटर तक की बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया वृद्धि के बाद ईंधन के दामों में इस इजाफे ने देश भर में महंगाई के नए दौर की आशंका को जन्म दे दिया है। विशेष रूप से राजधानी दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में ईंधन की नई दरों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह से चरमरा दिया है।

ईंधन की कीमतों के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल अब 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। इसी तरह डीजल की कीमत भी 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गई है। दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों पर प्रति लीटर 3 रुपये की सीधी वृद्धि की गई है। केवल वाहन ईंधन ही नहीं बल्कि प्रदूषण मुक्त ईंधन माने जाने वाली सीएनजी भी महंगाई से अछूती नहीं रही है। दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के साथ नई दरें 79.09 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। यह वृद्धि उन लाखों ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए बड़ा झटका है जो दैनिक कमाई के लिए पूरी तरह सीएनजी पर निर्भर हैं।

महानगरों के आंकड़ों पर गौर करें तो कोलकाता में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक 3.29 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है जिससे वहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत 108.74 रुपये हो गई है। मुंबई में पेट्रोल 3.14 रुपये की तेजी के साथ 106.68 रुपये पर पहुंच गया है जबकि चेन्नई में यह 2.83 रुपये बढ़कर 103.67 रुपये के स्तर को छू रहा है। डीजल के मामले में भी कोलकाता और मुंबई में 3.11 रुपये की वृद्धि के साथ कीमतें क्रमशः 95.13 रुपये और 93.14 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। चेन्नई में भी डीजल की कीमतों में 2.86 रुपये की वृद्धि की गई है। तेल कंपनियों का तर्क है कि कच्चे तेल की खरीद महंगी होने के कारण उनका मार्जिन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और उन्हें हर महीने लगभग 30,000 करोड़ रुपये का भारी घाटा उठाना पड़ रहा था।

इस वृद्धि का सबसे चिंताजनक पहलू इसका सीधा असर दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर पड़ना है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल के महंगे होने से माल ढुलाई यानी ट्रांसपोर्टेशन की लागत में तत्काल वृद्धि होगी। इसका परिणाम यह होगा कि मंडियों से शहरों तक आने वाली सब्जियां, फल, राशन और दूध की कीमतें बढ़ जाएंगी। थोक महंगाई के आंकड़े पहले ही डरावने स्तर पर हैं जहां अप्रैल के आंकड़ों के अनुसार पेट्रोल की महंगाई दर 32.4 फीसदी तक पहुंच गई है। ब्रेंट क्रूड की अंतरराष्ट्रीय कीमतें 1.35 फीसदी की तेजी के साथ 107.2 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही हैं। ईरान युद्ध के प्रारंभ से अब तक कच्चा तेल लगभग 50 फीसदी महंगा हो चुका है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत का लगभग 90 फीसदी कच्चा तेल खाड़ी देशों से मंगाता है। होर्मुज स्ट्रेट में उत्पन्न गतिरोध के कारण दुनिया की लगभग 20 फीसदी तेल आपूर्ति बाधित हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द समाप्त हो भी जाता है तो भी वैश्विक तेल आपूर्ति को सामान्य स्थिति में लौटने में काफी समय लग सकता है। ईंधन की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारतीय बाजारों में उपभोक्ता मांग और विकास दर को भी प्रभावित कर सकती है। आगामी दिनों में यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी नहीं आई तो आम आदमी के लिए घर का खर्च चलाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

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Lalita Rajput

Lalita Rajput

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